तमकुही तहसील के निबंधन कार्यालय में दलालों का बोलबाला?

Sep 30, 2026 - 21:31
Sep 30, 2026 - 21:33
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तमकुही तहसील के निबंधन कार्यालय में दलालों का बोलबाला?

तमकुही तहसील के निबंधन कार्यालय में दलालों का बोलबाला?

निजी कर्मियों की सक्रियता पर उठे सवाल, लोकल टैक्स वसूली की जिम्मेदारी संभालने

के आरोप

सरकारी कार्यालय में निजी लोगों की भूमिका पर सवाल—किसके इशारे पर चल रहा

कथित वसूली का खेल?

अमिट रेखा/जिला प्रभारी/कुशीनगर

 तमकुही तहसील परिसर स्थित निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कार्यालय के आसपास कथित रूप से दलालों और निजी तौर पर सक्रिय व्यक्तियों की मौजूदगी बनी रहती है। आरोप है कि ये लोग आम लोगों के दस्तावेजी कार्यों में हस्तक्षेप करने के साथ ही लोकल टैक्स की वसूली में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी कार्यालय से संबंधित शुल्क अथवा टैक्स की वसूली निजी व्यक्तियों के माध्यम से हो रही है तो उन्हें यह जिम्मेदारी किस आदेश या नियम के तहत मिली है? क्या ऐसे निजी कर्मियों की विभागीय अनुमति है? और यदि अनुमति नहीं है तो कार्यालय परिसर में उनकी सक्रियता पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कुशीनगर जनपद के बिहार बार्डर से सटे तमकुहीराज निबंधन कार्यालय इन दिनों सुर्खियो में है उक्त कार्यलय में इन दिनों दलालों का बोलबाला है दलालों के कहने पर सब कुछ संभव हो जाता जाता है। यहाँ दिन भर दर्जनों कि संख्या में प्राइवेट कर्मी अपने सेवा के लिए उपलब्ध रहते है, सूत्रों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के इशारे पर वसूली कि रकम का डिमांड करते है।अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग चढावा देना ही पड़ता है।चढ़ावा कि रकम कम होने पर साहब द्वारा आदेश को रोका जाता है,चाहे चकमार्ग का निर्धारण या पक्की सड़क का होना का रेट लगाकर वसूली कराते है। कई बार जिसका बिरोध करने पर पूर्व के उप-जिलाधिकारी द्वारा कुछ लोगो को तहसील परिसर में बैठाया गया था, लेकिन उन लोगो को पुनः छोड़ा गया।       

                          -----------   आम आदमी को कार्यालय से ज्यादा दलालों पर निर्भरता?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निबंधन कार्यालय में पहुंचने वाले कई लोगों को सीधे संबंधित प्रक्रिया की जानकारी मिलने के बजाय बिचौलियों के माध्यम से काम कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

        -----------  लोकल टैक्स की वसूली बनी जांच का अहम बिंदु

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित लोकल टैक्स वसूली है। यदि निजी कर्मचारी यह कार्य कर रहे हैं तो उनके पास किस विभाग की अधिकृत रसीद, पहचान और लिखित आदेश है—यह सार्वजनिक होना चाहिए। बिना अधिकृत व्यवस्था के किसी भी प्रकार की सरकारी वसूली की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

   ---------- जिम्मेदार अधिकारी क्या कहते हैं?

मामले में संबंधित निबंधन अधिकारी का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण पड़ताल: आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष,जाना गया तो  कार्यालय में कार्यरत निजी कर्मियों की संख्या कितनी है, उनकी भूमिका क्या है  तमकुही निबंधक अधिकारी ने बताया कि हमारे पास कोई प्राइवेट कर्मचारी नहीं है,और उक्त के सम्बंध में जिला केअधिकारी ए०डी०एम को जरिये फ़ोन० न०पर फ़ोन किया  गया तो फ़ोन उठाने में अश्मअर्थ दिखे।

      --------   उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

* निबंधन कार्यालय में निजी कर्मी किसकी अनुमति से सक्रिय हैं?

* लोकल टैक्स की वसूली कौन करता है और पैसा सरकारी खाते में कैसे जमा होता है?

* क्या प्रत्येक वसूली की अधिकृत रसीद दी जाती है?

* कार्यालय परिसर में दलालों की कथित सक्रियता पर निगरानी कौन करता है?

* आम नागरिकों को सीधे सरकारी प्रक्रिया की जानकारी क्यों नहीं मिलती?

* यदि आरोप गलत हैं तो विभाग इसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं करता?

--------    जांच हुई तो खुल सक्ती है पूरी व्यवस्था

स्थानीय नागरिकों की मांग है कि तहसील और निबंधन विभाग के उच्चाधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, निजी कर्मियों की भूमिका, वसूली की रसीदों तथा संबंधित आदेशों की जांच से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। यदि जांच में अनधिकृत वसूली या नियमविरुद्ध निजी हस्तक्षेप सामने आता है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।