₹41 करोड़ के अतिरिक्त भार और कोर्ट में लंबित मामले के बीच प्रक्रिया पर रोक की मांग
संविदा सेवा को CAS में जोड़ने पर सवाल
₹41 करोड़ के अतिरिक्त भार और कोर्ट में लंबित मामले के बीच प्रक्रिया पर रोक की मांग
अमिट रेखा/संतराज यादव/सहजनवा गोरखपुर
प्रयागराज राजकीय महाविद्यालयों में संविदा शिक्षकों की पूर्व संविदा सेवा को CAS प्रोन्नति में जोड़ने के प्रस्ताव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बावजूद प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने से सीधी भर्ती के शिक्षकों में असंतोष है।
आंकड़ों के अनुसार यदि 290 संविदा शिक्षकों को CAS का लाभ दिया गया तो प्रति शिक्षक ₹1.20 लाख प्रतिमाह अतिरिक्त व्यय होगा। इससे सरकार पर ₹3.48 करोड़ प्रतिमाह और ₹41.76 करोड़ सालाना का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
आशंका है कि इसका असर केवल राजकीय कॉलेजों तक सीमित नहीं रहेगा। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के 600 शिक्षक, माध्यमिक के संविदा प्रवक्ता और बेसिक के शिक्षामित्र भी समानता के आधार पर यही मांग करेंगे, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय और प्रशासनिक विवाद खड़े होंगे।
UPPSC से चयनित शिक्षकों ने उच्च शिक्षा निदेशालय और शासन को पत्र भेजकर आपत्ति जताई है कि इससे उनकी वरिष्ठता और पदोन्नति प्रभावित होगी। शिक्षकों ने UGC विनियमों के तहत निष्पक्ष परीक्षण की मांग की है।
यह प्रकरण हाईकोर्ट इलाहाबाद में Writ-A No. 5216/2026 के रूप में लंबित है, जिसमें राज्य सरकार पक्षकार है। शिक्षकों की मांग है कि शासन विधि और वित्त विभाग से राय लेकर, न्यायिक स्थिति स्पष्ट होने तक अंतिम निर्णय पर रोक लगाए और सभी आंकड़ों का मूल अभिलेखों से सत्यापन कराए।