हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सुनवाई नहीं ,छात्रा ने कार्यकारी निदेशक से लगाई न्याय की गुहार

Oct 6, 2026 - 16:57
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सुनवाई नहीं ,छात्रा ने कार्यकारी निदेशक से लगाई न्याय की गुहार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सुनवाई नहीं 

छात्रा ने कार्यकारी निदेशक से लगाई न्याय की गुहार

अमिट रेखा संतराज यादव सहजनवा गोरखपुर 

गोरखपुर एम्स गोरखपुर की एमबीबीएस 2020 बैच की छात्रा अंशिका भारद्वाज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर एम्स के कार्यकारी निदेशक को प्रार्थना पत्र सौंपा है। छात्रा ने हाईकोर्ट के रिट संख्या 29887 / 2026 में दिनांक 01.09.2026 को पारित आदेश का हवाला दिया है।
प्रार्थना पत्र में छात्रा ने कहा है कि माननीय न्यायालय ने अपने आदेश के पैरा 8 में उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान करने और उसके दावों व संबंधित अभिलेखों की जांच करने का निर्देश दिया है। वहीं पैरा 9 में आवश्यकता पड़ने पर अन्य विद्यार्थियों के अभिलेखों के परीक्षण की अनुमति दी गई है। पैरा 10 में शैक्षणिक अधिष्ठाता को सभी आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख उपलब्ध कराने तथा पैरा 11 में तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
छात्रा का आरोप है कि वर्तमान में चल रही विभागीय जांच से वह संतुष्ट नहीं है। उसे जिस प्रकार पूर्ण और प्रभावी रूप से सुना जाना चाहिए, वैसा नहीं हो रहा है। विशेष रूप से परीक्षा अधिष्ठाता डॉ. मनोज सौंरभ द्वारा बार-बार अलग-अलग नियमों का हवाला देकर उसके अभिलेखों और तुलनात्मक अभिलेखों की जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है।
छात्रा ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि जब उसने समान परिस्थितियों वाले अन्य विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं और अभिलेखों से तुलना की मांग की, तो उसे नियमों का हवाला देते हुए केवल अपने मामले तक सीमित रहने को कहा गया, जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने उसे अन्य विद्यार्थियों के अभिलेखों के परीक्षण की स्पष्ट अनुमति दी है। ऐसे में जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रार्थना पत्र में छात्रा ने यह भी बताया है कि उसी के सत्र की एक अन्य छात्रा को आठवां विशेष अवसर (मर्सी अटेम्प्ट) दिया गया है और कई अन्य विद्यार्थियों को अलग-अलग उपस्थिति मानदंडों के आधार पर व्यावसायिक परीक्षा में बैठने का अवसर दिया गया है, जबकि उसके मामले में अलग मानदंड अपनाया जा रहा है। इसलिए तुलनात्मक सत्यापन किया जाना अत्यंत आवश्यक है।