शनि ग्रह  उसके प्रभाव एवं उपाय  - पं देवेन्द्र प्रताप मिश्र 

Jan 22, 2026 - 19:25
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शनि ग्रह  उसके प्रभाव एवं उपाय  - पं देवेन्द्र प्रताप मिश्र 

शनि ग्रह  उसके प्रभाव एवं उपाय  - पं देवेन्द्र प्रताप मिश्र 

अमिट रेखा/ जितेन्द्र कुमार 

गोरखपुर।शनि कालॆ रंग का,तीक्ष्ण, उग्र व क्रूर ग्रह है, तथा यह संध्या समय ज्यादा बलवान होता है ज्योतिष ग्रंथो में शनि,यम,मृत्यु ,काल ,दुख, दैन्य व मंद आदि अशुभ नामों से पुकारा गया है अंग्रेज लोग इसे सैतान ,reaper व evil eye के नाम से पुकारते हैं कहते हैं, शनि की दृष्टि बड़ी खराब होती हैं इसकॆ जन्म होते ही इसकी दृष्टि अपने पिता सूर्य पर पड़ी,उससे तत्काल ही सूर्य कुष्ठ रोग से पीड़ित हुआ, उसका सारथी अरुण पंगु हुआ तथा उसके घोड़े अंधे हो गए जातक के जन्म राशि पर, दूसरे तथा बारहवें आने पर शनि की साढ़ेसाती लग जाती हैं जन्म राशि पर आने पर व्यक्ति को मानसिक परेशानी या,, कार्य में रूकावटें, आर्थिक हानि, व्यर्थ की भागदौड़, वायु प्रकोप,चमऀरोग इत्यादि का सामना करना पड़ता है दूसरे स्थान पर होने से परिवार में किसी की मृत्यु, कौटुंबिक कलह, पत्नी को कष्ट अचानक धन हानि एवं ऋणग्रस्त होने की नौबत आ जाती है बारहवें आने पर दुर्घटना, गुप्त शत्रुओं का प्रकोप  नेत्ररोग पैरों में तकलीफ खर्च इत्यादि होता है जन्म से चौथे व आठवें आने पर शनि की ढैया लगती है, जिससे जातक को कष्ट प्रद परिस्थितियों के बीच में से होकर गुजरना पड़ता है शनि के दूषित प्रभाव को भुक्तभोगी अच्छी तरह से जानते है इसके समाधान हेतु निम्न उपाय प्रभावशाली है जो मैं कल आप सभी को बता दुंगा पं पंडित देवेन्द्र प्रताप मिश्र।    
शनि के साढेसाती ,ढैया व दशा के प्रभाव से बचने के लिए प्रति शनिवार सूर्यास्त के समय कीड़ी नगरा सीचे तो सफलता मिलती है,काले घोड़े की नाल की अंगूठी शनि व पुष्य नक्षत्र को बनाकर पहनें,इससे अच्छा लाभ मिलता है, भाग्य की समस्त बाधा दूरहोकर सभी कार्यों में सफलता मिलती है,शनि का दिन हो और साथ में पुष्य नक्षत्र हो उस दिन पानी वाला नारियल को लेकर उसके जटा उतारकर उसके छेद में यथासंभव शक्कर भर दें तत्पश्चात सायंकाल के समय काले वस्त्र से उस नारियल को ढककर किसी भी पीपल के वृक्ष की जड़ में ऐसा गाड़े कि अन्य पशु पक्षी उसको न खा सके इस प्रकार चींटियों को लगभग एक माह की खुराक मिल जाती है शनि ग्रह का कुप्रभाव ज्यादा खतरनाक हो तो शनि के मन्दिर जाये तेलदान छायादान,करें शनि के जप कराये स्वयं बजरंग बाण का पाठ करें शनिवार को पीपल के वृक्ष को जल से सींचे एवं सात परिक्रमा करें जल में काले तिल डालकर जल देना चाहिए ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।