यूपी में सरकारी भर्ती की नई नीति लागू, सत्यापन से पहले भी मिल सकेगी अस्थायी नियुक्ति

Oct 29, 2026 - 05:47
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यूपी में सरकारी भर्ती की नई नीति लागू, सत्यापन से पहले भी मिल सकेगी अस्थायी नियुक्ति

संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत जांच अनिवार्य, गंभीर अपराधों में आरोपित अभ्यर्थियों पर सख्ती

अखिलेश राय, कार्यकारी सम्पादक (अमिट रेखा) : लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर नई नीति लागू की है। इसके तहत अभ्यर्थियों को चरित्र सत्यापन पूरा होने से पहले भी प्रोविजनल नियुक्ति दी जा सकेगी। हालांकि, संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव एम. देवराज ने बुधवार को नई नीति जारी की।

नई व्यवस्था राज्य सरकार के विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होगी। पहले से लंबित मामलों का निस्तारण भी इसी नीति के अनुसार किया जाएगा।

कई जिलों से कराया जाएगा सत्यापन

नई नीति के अनुसार, अभ्यर्थियों के चरित्र का सत्यापन पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना), उनके गृह जिले तथा पिछले पांच वर्षों के दौरान एक साल से अधिक समय तक निवास किए गए जिलों से कराया जाएगा। सामान्य मामलों में पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जाएगी। इसके लिए अभ्यर्थी की भौतिक उपस्थिति या पूछताछ को अनिवार्य नहीं रखा गया है। यदि सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो संबंधित अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

जानकारी छिपाने पर रद्द हो सकती है नियुक्ति

अभ्यर्थियों को आवेदन के समय गिरफ्तारी, अभियोजन, दोषसिद्धि, पूर्व सेवा से बर्खास्तगी तथा किसी आयोग या भर्ती बोर्ड की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों की जानकारी देना अनिवार्य होगा। किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने या गलत जानकारी देने पर नियुक्ति निरस्त की जा सकती है।

गंभीर अपराधों में अपात्र होंगे अभ्यर्थी

नीति के तहत केंद्र या राज्य सरकार से बर्खास्त किए गए व्यक्तियों के साथ गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना जाएगा। निर्धारित मामलों में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने पर भी अभ्यर्थी की पात्रता प्रभावित होगी।

हत्या, बलवा, देशद्रोह, फिरौती के लिए अपहरण, दुष्कर्म, दहेज हत्या, पॉक्सो अधिनियम से जुड़े अपराध, पेपर लीक, नकल गिरोह, साल्वर गैंग और फर्जी प्रमाणपत्र जैसे मामलों को भी अपात्रता के दायरे में शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त डिजिटल अरेस्ट और यूपीआई धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) तथा गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में भी निर्धारित शर्तों के अनुसार अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा।

राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं होगी अयोग्यता

नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा के आधार पर उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। हालांकि, हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलने के घोषित उद्देश्य वाले संगठनों के सदस्यों को पात्रता से बाहर रखा जाएगा।

सरकार की इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता बनाए रखना, चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय लेना है।

Akhilesh Rai कार्यकारी संपादक अमिट रेखा हिंदी दैनिक समाचार पत्र