फाजिलनगर में NH 28,पर अधूरी सड़क बनी मुसीबत,वर्षों से लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता!”

Oct 11, 2026 - 17:50
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फाजिलनगर में NH 28,पर अधूरी सड़क बनी मुसीबत,वर्षों से लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता!”

 फाजिलनगर में NH 28,पर अधूरी सड़क बनी मुसीबत,वर्षों से लापरवाही का खामियाजा भुगत रही जनता!”

हाईवे बनने के बाद से अधूरी पड़ी पटरी, हादसों ने उजाड़े कई परिवार,जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

वर्षों से अधूरी सड़क, जिम्मेदार कौन? सिंचाई विभाग के डॉक बंगले के बगल कट से आवागमन में परेशानी,राहगीरों को हो रही दिक्कत

 अमिट रेखा/फाजिलनगर/कुशीनगर 

 फाजिलनगर में एनएच-28 पर सिंचाई विभाग के बंगले के पास स्थित कट पर सड़क का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे बनने के बाद से अधूरी पड़ी पटरी, हादसों ने कई परिवार को उजाड़ दिया है,जो आज भी भूख मरी के कगार पर है,सड़क की बदहाल स्थिति और निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से आम लोगों के बीच जिम्मेदार विभाग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिंचाई डाक बंगले के पीछे NH-28 की पटरी का निर्माण हाईवे बनने के बाद से ही अधूरा पड़ा होने का आरोप है। लंबे समय से बदहाल पड़ी पटरी और अधूरे निर्माण के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।इस स्थान पर लगातार दुर्घटनाएं होती रही हैं। उनका दावा है कि हादसों में दर्जनों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि सैकड़ों लोग घायल होकर अंग-भंग का शिकार हुए हैं। वैसे तो यह समउर मोड़ वाला रोड ख़राब रोड़ो में महारत हासिल है इस रोड कि स्थिति अत्ति दयनीय है इस रोड से जाने में लोग झिझकते है,इसके बावजूद सड़क की स्थिति सुधारने और अधूरा निर्माण पूरा कराने को लेकर जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीण सूत्रों का कहना है कि यदि वर्षों से अधूरे पड़े हिस्से का निर्माण समय रहते पूरा कर दिया जाता तो दुर्घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता था। अब सवाल यह है कि इतने हादसों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या का संज्ञान कब लेंगे?

स्थानीय लोगों ने अधूरे निर्माण को तत्काल पूरा कराने, सड़क की तकनीकी जांच कराने और दुर्घटना संभावित स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की मांग की, ताकि लोगों को आवागमन में हो रही परेशानियों से राहत मिल सके। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जनता की इस समस्या को गंभीरता से लेते हैं या फिर लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।