कुशीनगर में 5 दिनों से सचिव के खिलाफ अनिश्चित कालीन आमरण अनशन पर
कुशीनगर में 5 दिनों से सचिव के खिलाफ अनिश्चित कालीन आमरण अनशन पर
कुशीनगर में कर्मचारी बेलगाम अधिकारी बेजुबान तभी तो
दमदार कार्रवाई के बिना बेदम हो रहे ग्राम प्रधान-सूत्र
अधिकारियों की मनमानी पर सवाल, ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ रहा प्रभाव
अमिट रेखा /नितांत सिंह/ पटहेरवा (कुशीनगर)
प्रदेश में योगी सरकार जहां भ्रष्टाचार और लापरवाही पर “जीरो टॉलरेंस” नीति का दावा करते है, वहीं जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। कई जिलों में ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनती जा रही है। कुशीनगर में तो दमदार कार्रवाई के बिना बेदम हो रहे ग्राम प्रधान सूत्रो का आरोप है कि कुछ विभागीय कर्मचारी बेलगाम और अधिकारी बेजुबान हो चुके हैं, जिससे ग्राम पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तमकुही विकास खंड के जोगिया सुमाली पट्टी के प्रधान रमेश प्रसाद पिछले 5 दिनों से सचिव के खिलाफ अनिश्चित कालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं,उनका आरोप यह हैं कि उनके पंचायत के सचिव द्वारा ग्राम सभा के सभी विकास कार्य में बाधा उत्पन किया जा रहा हैं। और जो पिछले दो सालों में ग्राम विकास का कार्य प्रधान द्वारा किया गया हैं उसका भुगतान भी नहीं किया जा रहा।और मनमाने तरीके से कमीशन का डिमांड किया जा रहा हैं। सूत्रों कि माने तो उक्त ग्राम सभा के सचिव पर इस तरीके के पहले भी बहुत सारा आरोप लग चुका हैं।और कई बार विभागीय कार्यवाही भी हो चुका हैं।ग्राम सभा जोगिया सुमाली पट्टी के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सचिव पर ऊपर के अधिकारियों का पूरा सहयोग रहता हैं,जिसके श्रेय से सचिव अपना मनमानी करता हैं।और किसके दम पर इतना आरोप लगने के बाद लगभग दर्जनों गाव का कार्य प्रभार इनके पास है जबकि काफी दिनों से प्रधान एवं अगल बगल के प्रधानो द्वारा बिरोध के बावजूद अंगद कि तरह पॉव जामये बैठे है यह सवालिया निसान जिले के अधिकारी एवं ब्लाक के कर्मचारियों पर आम जनमानस में उठ रहा है
कुछ ग्रामीण सूत्रों का यह भी कहना है कि कही पूर्ब में हुवे ग्राम प्रधान चुनाव में पूर्ब प्रत्यासियो के कुछ सजातीय रिश्तेदार कर्मचारी एवं अधिकारियो कि मिली भगत से योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक अड़ंगे डाले जा रहे हैं। फाइलें लंबित रखी जाती हैं, तकनीकी आपत्तियों के नाम पर भुगतान रोका जाता है और छोटे-छोटे कार्यों में भी हस्तक्षेप बढ़ गया है। उनका आरोप है कि इससे गांवों में सड़क, नाली, आवास और शौचालय जैसी मूलभूत योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रहीं। विकास खंड के कुछ प्रधानों का यह भी कहना है कि अधिकारियों के दबाव के चलते वे स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। “हम जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, लेकिन हमें ही बेबस बना दिया गया है,” तथा सूत्रों का यह भी कहना है कि कुशीनगर जनपद के अधिकारी चाहते तो इसका समाधान पहले ही निकाल दिए होते लेकिन बस्तुसःउनकी भी संलिप्त्तता नजर आ रही है कही ऐसा तो नही कि सफ़ेदपोशो का इसमें भी हाथ हो पूर्ब में उक्त प्रधान द्वारा कई बार जिले से लेकर प्रदेश के दरवाजे पर दस्तक लगा चूका प्रधान अब हार थक अपने ग्राम सभा में पिछले एक सप्ताह से अनिश्चित कालीन धरने पर बैठा है अब इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अधिक प्रभावित ग्रामीण जनता हो रही है। कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आपसी खींचातानी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत स्तर पर स्पष्ट समन्वय तंत्र और जवाबदेही तय किए बिना विकास की गति तेज नहीं हो सकती।विपक्षी दलों ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए हमला बोला है, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि पारदर्शिता के कारण ही कुछ लोगों को परेशानी हो रही है।
सरकार की मंशा और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि समय रहते संवाद और समन्वय की प्रक्रिया मजबूत नहीं की गई तो ग्राम पंचायतों का विकास कार्य प्रभावित होना तय है।