लोकतंत्र बचाने का नारा देकर जनता को गुमराह कर रही सरकार: कामरेड राहुल यादव
लोकतंत्र बचाने का नारा देकर जनता को गुमराह कर रही सरकार: कामरेड राहुल यादव
कहा- लोकतंत्र किसी एक नेता की मर्जी से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के मुताबिक चलता है, जनता के प्रति जवाबदेह है सरकार
अमिटरेखा_ कृष्णा यादव
तमकुहीराज, कुशीनगर। लोकतंत्र में सत्ता का वास्तविक केंद्र जनता होती है और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। शासन व्यवस्था किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा या ताकत से नहीं, बल्कि संविधान की मान्यताओं और कानून के दायरे में संचालित होती है। लोकतंत्र बचाने का नारा देने वाली सरकार को सबसे पहले जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। यह बातें युवा समाजसेवी कामरेड राहुल यादव ने गुरुवार को एक वार्ता के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, समान मताधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के शासन पर निर्भर करती है। भारत में प्रत्येक नागरिक को समान मतदान का अधिकार प्राप्त है। प्रधानमंत्री से लेकर आम नागरिक तक सभी कानून के सामने बराबर हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति या संस्था को संविधान से ऊपर नहीं माना जा सकता।
कामरेड राहुल यादव ने आरोप लगाया कि आज आम जनता को अपनी समस्याओं और अधिकारों की आवाज उठाने के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करना पड़ रहा है। बेरोजगार युवा, किसान और आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष, न्यायपालिका और नागरिक समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और जवाब मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि एक ओर विपक्ष संविधान और मौलिक अधिकारों की रक्षा की बात करते हुए आंदोलन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष लोकतंत्र बचाने का नारा दे रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथों में है, तो उसे लोकतंत्र बचाने की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है? सरकार को नारों के बजाय अपने कामकाज और जनसमस्याओं के समाधान से लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी चाहिए।
राहुल यादव ने महंगाई और बेरोजगारी को आम जनता के सामने बड़ी चुनौती बताते हुए किसानों की समस्याओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और फसलों के नुकसान का पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। नारायणी नदी में आई बाढ़ से चैनपट्टी क्षेत्र में बांध टूटने के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि की फसल प्रभावित हुई, लेकिन किसानों को अब तक अपेक्षित मुआवजा नहीं मिल सका है।
उन्होंने सेवरही चीनी मिल की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नवंबर का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन पेराई सत्र शुरू नहीं होने से गन्ना किसान परेशान हैं। खेत खाली कर गेहूं की बुवाई करने की चिंता में किसान गन्ना क्रय केंद्रों और निजी क्रशरों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। इससे किसानों की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
अंत में कामरेड राहुल यादव ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता का विश्वास है। सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए और किसानों, युवाओं तथा बेरोजगारों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। लोकतंत्र केवल चुनाव और नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के अधिकारों, सम्मान और जवाबदेही से इसकी वास्तविक पहचान होती है।