श्रीमद्भागवत कथा के अमृतमयी प्रवचनों से भावविभोर हुए श्रद्धालु, भक्ति रस में डूबा कोटवा टीकमपार
आठ दिवसीय कथा के समापन पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 6 नवंबर को विशाल भंडारे का हुआ आयोजन
अमिटरेखा_ कृष्णा यादव
तमकुहीराज, कुशीनगर। तमकुहीराज विकासखंड के ग्राम सभा कोटवा टीकमपार में आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। कथावाचक के मुखारविंद से निकली भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और सनातन धर्म के आध्यात्मिक संदेशों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा पंडाल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
मुख्य यजमान हीरा यादव के पारिवारिक परिसर में 29 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित कथा में कथावाचक ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी ग्रंथ है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, श्रद्धा, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। भगवान की प्राप्ति के लिए बाहरी आडंबर से अधिक आवश्यक निष्कपट प्रेम, सच्ची श्रद्धा और पूर्ण समर्पण है।
प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक ने गोकुल और वृंदावन में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, गोप-गोपियों के साथ उनकी लीलाओं तथा पूतना, शकटासुर और तृणावर्त जैसे असुरों के वध के प्रसंगों को सुनाया। उन्होंने बताया कि नंद बाबा के यहां बाल रूप में पले श्रीकृष्ण गायों को चराने जाते थे, इसलिए उन्हें गोपाल के नाम से भी जाना जाता है।
कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए मन को परमात्मा में लगाना चाहिए। निष्काम कर्म, आत्मज्ञान, वैराग्य और भक्ति ही जीवन को सार्थक बनाने के प्रमुख आधार हैं। मनुष्य जीवन अनमोल है, इसलिए इसे व्यर्थ के मोह-माया और अहंकार में गंवाने के बजाय सत्कर्म, परोपकार और ईश्वर भक्ति में लगाना चाहिए।
उन्होंने शरीर और आत्मा के अंतर को समझाते हुए कहा कि शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अमर है और परमात्मा का अंश है। जीवन में सुख-दुख, लाभ-हानि तथा मान-अपमान जैसी परिस्थितियों में मन को संतुलित रखना ही सच्चे योग और आध्यात्मिक साधना का परिचायक है। भगवान श्रीकृष्ण का संदेश है कि प्रत्येक प्राणी में परमात्मा का स्वरूप देखने वाला व्यक्ति ही वास्तविक भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
कथा के दौरान भगवान श्रीराम सहित विभिन्न देवी-देवताओं के प्रसंगों का भी वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं को नियमित दिनचर्या के साथ ईश्वर का स्मरण करने, सदाचार अपनाने और भगवान के उपदेशों को अपने व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी गई।
आठ दिवसीय धार्मिक आयोजन के समापन के बाद 6 नवंबर को मुख्य यजमान हीरा यादव की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें आमंत्रित अतिथियों, ग्रामीणों और क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर हीरा यादव, अमरजीत यादव, हरकेश यादव, ठाकुर राजेश सिंह, बाबूलाल सिंह, हृदयानंद यादव, राधा बाबू सिंह सहित गांव के गणमान्य नागरिक, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे। आयोजन ने गांव में धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।