बेहद कठिन परिस्थितियों में हासिल की सफलता, माउंट यूनम फतह करने वाली गोरखपुर की पहली महिला बनीं -दिव्या सिंह
गोरखपुर की बेटी दिव्या सिंह ने 20,049 फीट ऊंचे माउंट यूनम को
किया फतह
बेहद कठिन परिस्थितियों में हासिल की सफलता, माउंट यूनम फतह
करने वाली गोरखपुर की पहली महिला बनीं दिव्या सिंह
अमिट रेखा संतराज यादव सहजनवा गोरखपुर
गोरखपुर/मनाली। मैं, दिव्या सिंह, गोरखपुर की रहने वाली पर्वतारोही एवं साइकिलिस्ट हूं। मुझे बेहद खुशी और गर्व है कि मैंने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में स्थित 20,049 फीट ऊंचे माउंट यूनम की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अपना अभियान पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ मैं माउंट यूनम फतह करने वाली गोरखपुर की पहली महिला बनी हूं।
यह अभियान मेरे लिए बिल्कुल आसान नहीं था। इस अभियान में कुल 10 पर्वतारोही शामिल थे, लेकिन बेहद खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के कारण केवल चार पर्वतारोही ही माउंट यूनम की चोटी तक पहुंच पाए, जिनमें मैं भी शामिल रही।
माइनस तापमान, बर्फबारी और ऑक्सीजन की कमी के बीच चढ़ाई
माउंट यूनम की चढ़ाई के दौरान हमें माइनस तापमान, तेज हवाओं, लगातार बर्फबारी और भारी स्नोफॉल का सामना करना पड़ा। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, ऑक्सीजन की कमी भी काफी महसूस होने लगी।
अंतिम चढ़ाई के लिए हम रात करीब 2 बजे एडवांस बेस कैंप से रवाना हुए। अंधेरा, कड़ाके की ठंड, तेज हवाएं और लगातार गिरती बर्फ के बीच हमने चढ़ाई शुरू की। लगभग 8 घंटे लगातार चढ़ाई करने के बाद हम माउंट यूनम की चोटी पर पहुंचे।
चोटी तक पहुंचने और वापस आने में लगभग 16 घंटे की कठिन जर्नी रही। इस दौरान पानी की उपलब्धता भी बेहद सीमित थी और करीब दो लीटर पानी के सहारे यह कठिन सफर पूरा करना पड़ा। खराब मौसम, लगातार स्नोफॉल, भोजन-पानी की कमी, शारीरिक थकान और ऑक्सीजन की भारी कमी के बावजूद हमने अपना हौसला बनाए रखा।
टॉप से करीब 100 मीटर पहले टूटने लगी थी हिम्मत
मेरे लिए इस अभियान का सबसे मुश्किल और भावुक पल वह था, जब मैं माउंट यूनम की चोटी से करीब 100 मीटर नीचे पहुंची। उस समय मेरी शारीरिक हालत बहुत खराब हो चुकी थी। अत्यधिक थकान, ऑक्सीजन की कमी, ठंड और लगातार कई घंटों की चढ़ाई के कारण मुझे आगे बढ़ना बेहद मुश्किल लग रहा था।
उस समय उमा सिंह सर, जो इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे थे और मेरे गाइड भी थे, उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। उन्होंने मुझे लगातार मानसिक रूप से मजबूत किया और हर कदम पर मेरा साथ दिया। उन्होंने मुझे ऊपर तक पहुंचने के लिए बहुत ज्यादा सपोर्ट किया और मेरा आत्मविश्वास बनाए रखा।
मैं दिल से मानती हूं कि अगर उस समय उमा सर ने मेरा हौसला नहीं बढ़ाया होता और मेरा साथ नहीं दिया होता, तो शायद मेरे लिए उस आखिरी हिस्से को पार करना बहुत मुश्किल होता। मैं अपनी इस यात्रा के सफलतापूर्वक पूरा होने का बड़ा श्रेय उमा सिंह सर को देती हूं। उनकी प्रेरणा, मार्गदर्शन और सहयोग की वजह से ही मैं उस कठिन समय में खुद को संभाल पाई और आखिरकार माउंट यूनम की चोटी तक पहुंच सकी।
ए.पी. गुप्ता इंटरमीडिएट कॉलेज का भी मिला भरपूर सहयोग
इस पूरे अभियान में मुझे अपने गृह विद्यालय ए.पी. गुप्ता इंटरमीडिएट कॉलेज, कस्बा संग्रामपुर, उन्नाव/गोरखपुर से भी बहुत सहयोग और विश्वास मिला। विद्यालय ने मेरे अभियान के लिए मुझे प्रोत्साहित किया, मेरा हौसला बढ़ाया और हर संभव सहयोग प्रदान किया।
मैं अपने विद्यालय के अमित गुप्ता सर, सचिन सर, सुधाकर सर और मदन विश्वकर्मा सर सहित विद्यालय परिवार का हृदय से धन्यवाद करती हूं। जिस तरह मेरे विद्यालय ने मुझ पर विश्वास किया और मेरे अभियान में मेरा साथ दिया, वह मेरे लिए बेहद भावुक और गर्व का विषय है।
मेरे लिए यह सफलता केवल मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। इसमें मेरे परिवार, मेरे गुरुजनों, मेरे सहयोगियों और उन सभी लोगों की मेहनत, विश्वास और आशीर्वाद शामिल है, जिन्होंने मेरे कठिन सफर में मेरा साथ दिया।
मैं उमा सिंह सर, ए.पी. गुप्ता इंटरमीडिएट कॉलेज के अमित गुप्ता सर, सचिन सर, सुधाकर सर, मदन विश्वकर्मा सर और पूरे विद्यालय परिवार का दिल से आभार व्यक्त करती हूं। आप सभी के सहयोग और विश्वास ने मुझे इस कठिन अभियान को पूरा करने की ताकत दी।
अब सपना है माउंट एवरेस्ट
माउंट यूनम की यह सफलता मेरे अगले और सबसे बड़े लक्ष्य की तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे पहले मैं साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली भारत की पहली महिला और विश्व की दूसरी महिला होने की उपलब्धि हासिल कर चुकी हूं।
अब मेरा सपना माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराना है। माउंट यूनम अभियान ने मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से और मजबूत बनाया है।
मेरे लिए पहाड़ सिर्फ ऊंचाई नहीं हैं, बल्कि वे हमारे साहस, धैर्य और इच्छाशक्ति की परीक्षा लेते हैं। माउंट यूनम की इस बेहद कठिन चढ़ाई ने मुझे एक बार फिर सिखाया कि जब मंजिल सामने हो और साथ देने वाले लोगों का विश्वास हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी पार किया जा सकता है।
9 अगस्त को माउंट यूनम की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचने के बाद अब मैं वापस मनाली लौट चुकी हूं। इस उपलब्धि को मैं अपने परिवार, अपने गुरुजनों, अपने विद्यालय, अपने सहयोगियों और उन सभी लोगों को समर्पित करती हूं जिन्होंने मेरे सपनों पर विश्वास किया।
माउंट यूनम के बाद अब मेरी नजर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी—माउंट एवरेस्ट—पर है। मेरा सफर अभी जारी है।