योगी नगरी में पादरी बाज़ार चौकी इंचार्ज बना ‘सुपर पावर’ पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश

Jan 8, 2026 - 18:32
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योगी नगरी में पादरी बाज़ार चौकी इंचार्ज बना ‘सुपर पावर’   पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश

योगी नगरी में पादरी बाज़ार चौकी इंचार्ज बना ‘सुपर पावर’

 पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश

अमिट रेखा/जुबैर अहमद/गोरखपुर

योगी नगरी में कानून-व्यवस्था सवालों के कटघरे में है। यहां चौकी इंचार्ज खुद को कानून से ऊपर समझते हुए पत्रकारों को खुलेआम धमकाने का काम कर रहा है। आरोप है कि शाहपुर थाना क्षेत्र के सईद आलम खान पुत्र मोहम्मद इद्रीस प्रार्थना पत्र   लेकर थाने गया था कि पादरी बाजार चौकी इंचार्ज के बिगड़े बोल, पत्रकार के साथ किया अभद्रता के साथ पेश आये।

मिली जानकारी के मुताबिक योगी नगरी में कानून का नहीं, चौकी इंचार्ज पादरी बाज़ार का चलता है सिक्का!पत्रकारों को खबर लिखने पर मिलती है धमकी,सवालों के घेरे में पुलिसिया कार्यशैली चौकी इंचार्ज पर मनमानी करने और पत्रकारों को धमकाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शाहपुर थाना क्षेत्र के सइद आलम खान पुत्र मोहम्मद इद्रीस खान मोहल्ला स्वास्तिक पुरम जिला गोरखपुर के निवासी हैं दिनांक 6 जनवरी  2026 को लगभग  सुबह  के 8 बजे के करीब 10-12 की संख्या भी मेरे घर पर गोलबंद होकर मेरे परिवार के सभी सदस्यों भाइयों एवं माँ के साथ मारपीट कर लहूलुहान कर दिए थे।

 पुलिस को आम तौर पर जनरक्षक माना जाता है और जब भी कोई व्यक्ति पीड़ित या प्रताड़ित होता है तो वह अपनी रक्षा के लिए पुलिस थाना और चौकी का ही सहारा लेता है। इसी क्रम में एक पत्रकार जो अपने परिवार के ऊपर हुए सामूहिक हमले की शिकायत लेकर शाहपुर थाना पहुंचा तो वहां पहले से बैठे पादरी चौकी इंचार्ज अखंड प्रताप सिंह ने एप्लीकेशन को भी ठीक से नहीं पढ़ा और अभद्रता करना शुरू कर दिया। चौकी इंचार्ज के इस रूखे व्यवहार और अभद्रता को देखकर इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि जब एक प्रतिष्ठित पत्रकार के साथ पुलिस के एक जिम्मेदार का ऐसा रवैया है तो आम आदमी का क्या होता होगा? फिलहाल खबर लिखे जाने तक इस अड़ियल चौकी इंचार्ज के विरुद्ध कोई प्रशासनिक कार्यवाही नहीं हुई है।

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि चौकी इंचार्ज पर मनमानी करने और पत्रकारों को धमकाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि चौकी इंचार्ज अपने पद का दुरुपयोग करते हुए,चौकी इंचार्ज की मनमानी इस हद तक बढ़ चुकी है कि खबर लिखने से पहले “इजाजत” लेने का दबाव बनाया जाता है। यह न केवल लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है, बल्कि कानून के राज पर भी करारा तमाचा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या योगी नगरी में अब संविधान नहीं, बल्कि एक चौकी इंचार्ज का हुक्म चलता है? अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकार संगठनों का आंदोलन तय माना जा रहा है।