छात्रों ने बनाई मानवरहित फोल्डिंग नाव, नौसेना के लिए बनेगी ‘सागर प्रहरी’
छात्रों ने बनाई मानवरहित फोल्डिंग नाव, नौसेना के लिए बनेगी ‘सागर प्रहरी’
अमिट रेखा/ संतराज यादव
गोरखपुर। तकनीकी नवाचार और देशभक्ति के जज़्बे का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए आईटीएम गीडा, गोरखपुर के बी.टेक और बीसीए द्वितीय वर्ष के चार छात्रों—अश्विनी कुमार उपाध्याय, मोहम्मद फैज़ल, भाग्यश्री पांडे और मोहम्मद साकिब—ने भारतीय नौसेना के लिए एक अत्याधुनिक मानवरहित फोल्डिंग नाव तैयार की है। यह नाव पलक झपकते ही पानी में तैनात होकर रिमोट और इंटरनेट के माध्यम से संचालित की जा सकती है। खास बात यह है कि यह नाव दुश्मनों की गतिविधियों पर नज़र रख सकती है और आवश्यक होने पर उन पर सटीक निशाना भी साध सकती है।
छात्रों की टीम ने बताया कि इस नाव के निर्माण की प्रेरणा भारतीय नौसेना दिवस से मिली, जो हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध के दौरान कराची हार्बर पर भारतीय नौसेना द्वारा किए गए सफल आक्रमण ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ की स्मृति में मनाया जाता है। टीम की सदस्य भाग्यश्री पांडे ने कहा, “ऑपरेशन ट्राइडेंट भारतीय नौसेना की शौर्य गाथा है, और उसी से प्रेरित होकर हमने यह मानवरहित नाव विकसित की है ताकि भविष्य में हमारे जवानों की सुरक्षा और भी मजबूत हो सके।”
नाव की कार्यप्रणाली के बारे में मोहम्मद फैज़ल ने बताया कि इसे लगभग 3 किलोमीटर तक दूरस्थ दिशा में भेजा जा सकता है। नाव में लगाए गए हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे की मदद से नौसेना के जवान बिना दुश्मन की नज़र में आए उनकी गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग कर सकते हैं। कैमरा इंटरनेट से जुड़कर वास्तविक समय की तस्वीरें भेजता है। साथ ही, आवश्यक होने पर रिमोट के माध्यम से इलेक्ट्रिक गन से गोलियां दागने की क्षमता भी इसमें मौजूद है।
टीम लीडर अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बताया कि यह तकनीक समुद्र में जवानों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है। उन्होंने कहा, “सीमा सुरक्षा में मानवरहित उपकरण दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। हमारी यह नाव समुद्र में दुश्मन की गतिविधियों को भांपने, उन पर निगरानी रखने और मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।”
प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाने वाले मोहम्मद साकिब ने बताया कि इस मानवरहित फोल्डिंग नाव को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगा और कुल लगभग 60 हजार रुपये की लागत आई। इसे बनाने में 8 फीट एयर बोट, हाई-क्वालिटी कैमरा, इलेक्ट्रिक गन, रेडियो रिमोट ट्रांसमीटर और रिसीवर सहित अन्य तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। नाव को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे मोड़कर आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और तुरंत तैनात किया जा सकता है।
आईटीएम गीडा के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने छात्रों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह नवाचार न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा, “नई तकनीकी सोच ही भविष्य का रास्ता तय करती है। छात्रों द्वारा विकसित यह मानवरहित नाव समुद्री तटों की सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है।”