आधुनिक खेती से बढ़ेगी पैदावार विशेषज्ञों ने दी आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने की सलाह

Dec 8, 2025 - 21:46
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आधुनिक खेती से बढ़ेगी पैदावार विशेषज्ञों ने दी आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने की सलाह

आधुनिक खेती से बढ़ेगी पैदावार विशेषज्ञों ने दी आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने की सलाह

अमिट रेखा/ राजधारी प्रसाद 

गोरखपुर। भटहट ब्लॉक सभागार में कृषि सूचना तंत्र सुदृढ़ीकरण और कृषक जागरूकता कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। बढ़ती जनसंख्या के लिए पौष्टिक व पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना आज की सबसे बड़ी चुनौती है—इसी मुद्दे को केन्द्र में रखकर कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने किसानों को नई तकनीकों व सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी रामानुज यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही आधुनिक कृषि मशीनरी, उन्नतशील बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रिप सिंचाई, मृदा परीक्षण और फसल संरक्षण जैसी सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करें। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित कृषि न केवल उत्पादन बढ़ाती है बल्कि लागत भी कम करती है।

कृषि अधिकारी अशोक कुमार गिरि ने बताया कि वर्तमान समय में बहुआयामी खेती की आवश्यकता है। अकेली फसल से बेहतर है कि किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन और सब्जी उत्पादन को भी अपनाएं। इससे कृषि आय कई गुना बढ़ सकती है और किसान आर्थिक रूप से अधिक मजबूत हो सकते हैं।

पशु चिकित्सा अधिकारी विवेक कुमार मिश्रा ने पशुपालन से जुड़े रोग, टीकाकरण, पोषण और पशुधन सुरक्षा पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वस्थ पशु ही किसान की असली पूंजी हैं, इसलिए नियमित टीकाकरण और उचित देखभाल अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में एडीओ आईएसबी जितेंद्र प्रताप मौर्या, राधवेंद्र प्रताप सिंह, हरेंद्र सिंह, बिकाऊ प्रसाद, जामवंत पटेल सहित कई कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे। कृषक इजहार अली, अदालती गुप्ता, तथा कृषक सहयोगी प्रियंका शर्मा और रीना शर्मा भी इस कार्यक्रम में शामिल रहीं।

किसानों ने कार्यक्रम में पूछे गए सवालों के जवाब पाकर खुशी जताई और कहा कि इस तरह की गोष्ठियां उन्हें नई जानकारी देने के साथ खेती के नए आयाम जोड़ने में मदद करती हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना रहा।