मौसम की मार से किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी, खेतों में बिछी धान की पकी फसल
कटाई से पहले तेज हवा और बारिश ने बढ़ाई मुसीबत, खेतों में जलभराव से फसल सड़ने की आशंका; आलू, सरसों और मटर की बुवाई पर भी संकट
अखिलेश राय, कार्यकारी सम्पादक (अमिट रेखा) : चौबेपुर/वाराणसी। मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। तेज हवाओं के साथ हुई रिमझिम बारिश के चलते खेतों में पककर तैयार धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। पहले से खेतों में पानी भरा होने के कारण गिरी हुई फसल के सड़ने और धान के दाने खराब होने की आशंका बढ़ गई है। फसल कटाई से ठीक पहले हुए इस नुकसान ने किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है।
गरथौली निवासी किसान दुर्गेश चौबे ने बताया कि उनकी खेती कौआपुर, परानापुर और गरथौली गांव में है। गरथौली और कौआपुर में उन्होंने बटाई पर खेती दे रखी है, जबकि परानापुर में मजदूरों की मदद से धान की रोपाई कराई थी। इस बार फसल अच्छी थी और करीब एक सप्ताह बाद कटाई शुरू होने की उम्मीद थी। इसी बीच तेज हवा और बारिश ने फसल को खेतों में गिरा दिया।
किसान के मुताबिक, 20 बिस्वा खेत में जुताई, नर्सरी तैयार करने, रोपाई, खाद और सिंचाई समेत अब तक 10 हजार रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। फसल तैयार होने के समय हुए नुकसान से लागत निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। खेतों में जलभराव के कारण गिरी हुई फसल की बालियां सड़ने और दाने खराब होने का खतरा बना हुआ है।
दुर्गेश चौबे ने बताया कि पिछले वर्ष भी बेमौसम बारिश और तेज हवा के कारण फसल को नुकसान हुआ था। लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए खेती करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि बटाई पर खेती करने के लिए भी लोग हिचकने लगे हैं। एक ओर फसल की लागत निकालने की चिंता है, तो दूसरी ओर अगली फसल की तैयारी का दबाव।
धान की कटाई में देरी, रबी की बुवाई पर पड़ेगा असर
खेतों में गिरी धान की फसल की कटाई में अधिक समय और मजदूरी लगने की आशंका है। इससे खेत खाली होने में देरी होगी और रबी की प्रमुख फसलों आलू, सरसों व मटर की बुवाई प्रभावित हो सकती है। समय पर बुवाई नहीं होने से आगामी फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में किसानों के सामने मौजूदा फसल बचाने के साथ अगली फसल का उत्पादन सुनिश्चित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
नुकसान के आकलन और मुआवजे की मांग
प्रभावित किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से खेतों का स्थलीय निरीक्षण कराकर फसल क्षति का आकलन कराने तथा नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि समय रहते आर्थिक सहायता मिल जाए तो अगली फसल की बुवाई के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। अब किसानों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और मौसम के अगले रुख पर टिकी हैं।