अमावस्या पर मासूम की बलि देने की साजिश! दिल्ली से सकुशल बरामद हुआ दो माह का बच्चा
100 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल महराजगंज पुलिस पहुंची दिल्ली, दो महिलाओं समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
अखिलेश राय, कार्यकारी सम्पादक (अमिट रेखा) : महराजगंज। अंधविश्वास की आड़ में दो माह के मासूम की बलि देने की कथित साजिश का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। ठूठीबारी थाना क्षेत्र के राजाबारी टोला रमजीता से अपहृत मासूम विक्की को पुलिस ने चार दिनों की मशक्कत के बाद दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड से सकुशल बरामद कर लिया। मामले में दो महिलाओं समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की योजना आगामी अमावस्या पर बच्चे की बलि देने की थी। मासूम की सुरक्षित बरामदगी पर पुलिस अधीक्षक ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
आधी रात घर से उठा ले गए थे मासूम
पुलिस के अनुसार, तीन नवंबर को गोविन्द पुत्र नन्दलाल निवासी राजाबारी टोला रमजीता ने ठूठीबारी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि रात करीब दो से चार बजे के बीच अज्ञात व्यक्ति घर में घुसकर उसके दो माह के बेटे विक्की को उठा ले गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर कई टीमें गठित कर दीं।
सीसीटीवी फुटेज बनी पुलिस की सबसे बड़ी कड़ी
अपहरण की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने घटनास्थल से लेकर आसपास के रास्तों पर लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में सुबह करीब 3:57 बजे एक संदिग्ध महिला बच्चे को गोद में लेकर राजाबारी पुल के पास से निचलौल रोड की तरफ जाती दिखाई दी। कैमरों की मदद से पुलिस ने महिला की आवाजाही का रास्ता तलाशा। वह ठूठीबारी बस स्टैंड से बस में सवार होकर शिकारपुर मोड़ पहुंची और वहां से घुघली की तरफ जाती नजर आई।
स्थानीय पूछताछ और मुखबिरों की मदद से संदिग्ध महिला की पहचान सावित्री पत्नी स्वर्गीय उमेश राजभर निवासी कफवा, थाना घुघली के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस की मदद से उसकी तलाश तेज कर दी।
महराजगंज से दिल्ली तक पुलिस का पीछा
तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से पुलिस टीम दिल्ली पहुंची। कश्मीरी गेट बस स्टैंड पर सावित्री अपने साथी करण कुमार गौतम के साथ एक शिशु के साथ मिली। पूछताछ में दोनों बच्चे के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। पुलिस ने बच्चे की तस्वीर परिजनों को भेजी, जहां पिता गोविन्द ने उसकी पहचान अपने बेटे विक्की के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने मासूम को सुरक्षित बरामद कर चिकित्सकीय परीक्षण कराया और परिजनों को सौंप दिया।
अंधविश्वास ने रची खौफनाक साजिश!
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने अंधविश्वास के चलते मासूम की बलि देने की कथित योजना बनाई थी। उनका मानना था कि ऐसा करने से सरस्वती का वर्षों से लापता पति और बेटा वापस लौट आएंगे तथा परिवार में पहले हुई अकाल मृत्यु की घटनाएं रुक जाएंगी।
पुलिस के अनुसार, नेपाल के बैरियहवा में रहने वाले एक कथित झाड़-फूंक करने वाले व्यक्ति की सलाह पर यह साजिश रची गई थी। आरोपियों की योजना आगामी अमावस्या के अवसर पर बच्चे की बलि देने की थी। हालांकि, पुलिस की तत्परता से समय रहते मासूम को बचा लिया गया।
दो महिलाओं समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में सावित्री पत्नी स्वर्गीय उमेश राजभर, सरस्वती पत्नी सदरी उम्र करीब 55 वर्ष, दोनों निवासी ग्राम कफवा थाना घुघली तथा करण कुमार गौतम पुत्र सुदर्शन कुमार गौतम उम्र करीब 22 वर्ष निवासी जनपद देवरिया को गिरफ्तार किया है।
पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम
मासूम की सकुशल बरामदगी में ठूठीबारी पुलिस, एसओजी, स्वाट, सर्विलांस टीम और डॉग ट्रैकर स्क्वायड की अहम भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने टीम का उत्साहवर्धन करते हुए 25 हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ और क्षेत्राधिकारी निचलौल रविन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में हुई। पुलिस टीम में थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह सहित उपनिरीक्षक बृजेश पाण्डेय, आलोक कुमार राय, रमेश पुरी, दिनेश सिंह यादव, महिला उपनिरीक्षक प्रियंका मौर्य, कांस्टेबल बलवन्त यादव, मृत्युंजय तिवारी, अरुण यादव, राजेश्वर मिश्रा, महिला कांस्टेबल प्राची वर्मा तथा एसओजी, स्वाट, सर्विलांस और डॉग ट्रैकर स्क्वायड के जवान शामिल रहे।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई से न केवल अपहरण का मामला सुलझा, बल्कि एक मासूम की जिंदगी पर मंडरा रहा गंभीर खतरा भी टल गया।