पीड़ित के साथ खड़ा होना अपराध नहीं, भयमुक्त सरकार को चुनौती बर्दाश्त नहीं
फाजिलनगर में व्यापारियों को मिला भरोसा, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सदस्य ने खोला मोर्चा
अमिटरेखा/हारून अली/फाजिलनगर/कुशीनगर
नगर पंचायत फाजिलनगर में जिला पंचायत के कथित दमनात्मक रवैये और एकतरफा मुकदमों से उपजे विवाद के बीच आज व्यापारियों को बड़ी राहत और संबल मिला। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य फूलबदन कुशवाहा ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यापारियों से संवाद किया और हर हाल में न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
फूलबदन कुशवाहा ने दो टूक कहा कि पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा होना कोई अपराध नहीं है। भय का माहौल बनाना, व्यापारियों और मीडिया कर्मियों को डराना-धमकाना और उन पर मुकदमे दर्ज कराना
सीधे-सीधे सरकार को चुनौती देना है, जिसे हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सरकार भयमुक्त सरकार है, और अगर किसी ने डर का माहौल कायम कर सरकार की बदनामी करने की कोशिश की तो कड़ी कार्रवाई होगी।उन्होंने यह भी कहा कि धनबल के सहारे विधवा के अधिकारों का हनन, व्यापारियों पर दमन और पत्रकारों को आरोपी बनाना न केवल लोकतंत्र पर हमला है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। आयोग इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेगा और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
इस अवसर पर व्यापारियों और स्थानीय जनसमुदाय नेफूलबदन कुशवाहा का फूल-मालाओं और अंगवस्त्र से भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में व्यापार मंडल
अध्यक्ष रामानंद गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष मनोज लाल श्रीवास्तव, महामंत्री ब्यास सिंह, आशिक अली, अरविंद प्रसाद, पुरुषोत्तम गुप्ता, रामायण चौरसिया, राधेश्याम मदेशिया सहित सैकड़ों व्यापारी व नागरिक उपस्थित रहे।व्यापारियों ने आयोग सदस्य के समक्ष अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि एकतरफा मुकदमे, पुलिसिया दबाव और प्रशासनिक चुप्पी ने उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। फूलबदन कुशवाहा के आश्वासन के बाद व्यापारियों में उम्मीद जगी है कि निष्पक्ष जांच, फर्जी मुकदमों की वापसी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
फिलहाल फाजिलनगर में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि भयमुक्त शासन के दावे ज़मीन पर कब उतरते हैं और क्या पीड़ित व्यापारियों को वाकई इंसाफ मिल पाता है।