फसल सुरक्षा आलू एवं सरसों की फसल में बचाव हेतु उपाय
अमिट रेखा /प्रदीप कुमार श्रीवास्तव /कुशीनगर
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसान भाइयों को अवगत कराया है, की जनपद में गिरते हुए तापमान के साथ-साथ आर्द्रता बढ़ने के कारण रबी की फसलों में कीट / रोग के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है. ऐसी दशा में आलू में अगेती एवं मछेती झुलसा सरसों में माहूँ एवं सफेद गेरुई रोग से प्रभावित होने की सम्भावना है।
इनके लक्षण एवं नियत्रण के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि *आलू का अगेती झुलसा रोग* यह रोग सबसे पहले जमीन के पास वाली पुरानी पत्तियों पर शुरु होता है। पत्तियों पर छोटे गोल गहरे भूरे रंग के धब्बे बनते है धब्बो के अन्दर एक के ऊपर एक गोल-गोल रेखायें दिखाई देती है, जो टारगेट या निशाना जैसी दिखती है। धब्बों के चारो ओर हल्का पीले रंग का घेरा बन जाता है। संक्रमण वढने पर धब्बे आपस में मिलकर पत्तियों को पूरी तरह से झुलसा देते है जिससे पत्तिया भूरी होकर गिर जाती है या तने से चिपक जाती है।
आलू का पछेती झुलसा रोग* इस रोग में पत्तियों पर काले या भूरे अनियमित धब्बे दिखते है जो बाद में पानी से भीगे हुये लगते है एवं उनके चारो और हल्का हरा घेरा हो सकता है। नम मौसम में पत्तियो की निचली सतह पर सफेद रुई जैसी फफूँद दिखती है। अत्यधिक प्रकोप की दशा में पौधा मुरझा जाता है साथ ही कन्दों के ऊपर गहरे भूरे एवं वैगनी रंग के धब्बे तथा अन्दरुनी हिस्से में लाल भूरा रंग दिखाई देता है तथा बाद में पूरा कन्द सड़ जाता है।
आलू के झुलसा रोग के नियत्रण हेतु कापरआक्सीक्लोराइड 50 प्रति० डब्लू पी 2.5 किग्रा० मात्रा अथवा मैकोजेब 75 प्रति० डब्लू पी की 1.25 किग्रा० मात्रा प्रति हेक्टे० की दर से 600-800 लीटर पानी में घोलकर सुरक्षात्मक छिड़काव करें।
सरसो का सफेद गेरुई रोग यह एक फफूंद जनित रोग है, इसका फगस पत्तियों की निचली सतह पर सफेद पाउडर एवं उभरे हुये फफोले बनाता है जिससे पत्तिया पीली पड़ कर मुरझा जाती है. फूल एय फलिया विकृत हो जाती है एवं उनमे बीज ठीक से नहीं बनते जिससे उपज में भारी कमी आती है।
नियंत्रण- नमी एवं जलजमाव से फसल को बचाये रखना चाहिये क्योकि इसका फफूंद नमी में तेजी से फैलता है। अत्यधिक प्रकोप की दशा में मैटालेक्सिल 8 प्रति० मैकोजेब 64 प्रति० डब्लू पी की एक किलोग्राम मात्रा को 250 से 300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड की दर से सुरक्षात्मक छिडकाव करें अथवा मैकोजेब 63 प्रति० + कार्बेन्डाजिम 12 प्रति० डब्लू पी की 25 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिडकाव करें।
सरसों में माहू कीट- इसके मध्यम प्रकोप की दशा में एजाडिरेक्टीन (नीम आयल) 0.15 प्रति० ई०सी० 25 लीटर प्रति हेक्टे की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें। 50 से 60 माहू प्रति 10 सेमी० केन्द्रीय टर्मिनल शूट होने पर डाइमेथोएट 30 प्रति० ई०सी० 1 लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति० एस०एल० 350 एम०एल० प्रति हेक्टे० की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट हो रही है वहा पाले से बचाव हेतु खेत में हल्की सिचाई करें एव नर्सरी के पौधों के बचाव हेतु पालीथीन या पुयाल से उगकर रखे। समस्त कृषक बन्धुओं अपनी फसल को कीट / रोग की समस्या के निदान हेतु सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली मोबाईल नम्बर 9452247111 एवं 9452257111 पर समस्या लिखते हुए या कीट / रोग से सम्बन्धित पौधे की फोटो के साथ अपना नाम विकास खण्ड एवं जनपद का नाम लिखते हुए SMS/WHATSAPP भेजें।
कृषक बन्धुओं को सम्बन्धित समस्या के निदान की सूचना 48 घण्टे के अन्दर मोबाईल पर भेजी जायेगी। अधिक जानकारी के लिए अपने जनपद के जिला कृषि रक्षा अधिकारी से सम्पर्क करे।