शब-ए-बारात इबादत और मगफिरत की रात है - मौलाना बदरुद्दीन
शब-ए-बारात इबादत और मगफिरत की रात है - मौलाना बदरुद्दीन
अमिट रेखा/बघौचघाट/ देवरिया
शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में से एक है, जिसे इबादत, तौबा और अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगने की रात माना जाता है। इस अवसर पर पथरदेवा क्षेत्र के मेदीपट्टी बेलवनिया मस्जिद के मौलाना बदरुद्दीन ने कहा कि शब-ए-बारात आत्ममंथन और अपने गुनाहों से तौबा करने की विशेष रात है। यह रात इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान माह की 15वीं तारीख को मनाई जाती है। शाबान का महीना इस्लाम में अत्यंत मुबारक माना गया है, जो रमजान से पूर्व आता है।
मौलाना बदरुद्दीन ने बताया कि मान्यता है कि इस रात सच्चे दिल से इबादत करने, गुनाहों की माफी मांगने और नेक इरादे के साथ दुआ करने वालों के गुनाह अल्लाह माफ फरमा देता है। इसी कारण मुस्लिम समुदाय के लोग पूरी रात जागकर नमाज अदा करते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और दुआओं और वजीफों में मशगूल रहते हैं। ‘शब-ए-बारात’ का अर्थ है गुनाहों से बरी होने की रात।
इस अवसर पर लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की कब्रों पर जाकर फातिहा पढ़ते हैं और उनके लिए मगफिरत की दुआ करते हैं। घरों और मस्जिदों में विशेष साफ-सफाई और सजावट की जाती है। कई घरों में हलवा व अन्य पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें फातिहा के बाद जरूरतमंदों और गरीबों में बांटा जाता है।
मौलाना बदरुद्दीन ने कहा कि शब-ए-बारात इस्लाम की चार मुकद्दस रातों में से एक है, जो इंसान को नेक राह पर चलने, आपसी भाईचारे और अल्लाह की इबादत की सीख देती है।