सप्त शक्ति संगम महिलाओं को सशक्त बनाने का मजबूत, मंच नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है,- ऋचा सिंह

Dec 22, 2025 - 18:20
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सप्त शक्ति संगम महिलाओं को सशक्त बनाने का मजबूत, मंच नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है,- ऋचा सिंह

सप्त शक्ति संगम महिलाओं को सशक्त बनाने का मजबूत, मंच नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है,- ऋचा सिंह

अमिट रेखा /छोटेलाल शास्त्री /सुकरौली बाजार/ कुशीनगर 

नगर पंचायत सुकरौली बाजार के वार्ड नम्बर-4 बुद्धनगर मे स्थित कन्हैयालाल सरस्वती शिशु मन्दिर एवं विद्या मन्दिर पिपरपाती सुकरौली मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार परिवार विद्या भारती द्वारा आयोजित सप्त शक्ति संगम' कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि . भारतीय महिला मण्डल गतिविधि के प्रभारी एवं शिक्षिका और लेखिका श्रीमती ऋचा सिंह ने उपस्थित नारी शक्ति स्वरूपा माँताओ बहनो को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज संघ विचार परिवार (विद्या भारती ) का मुख्य उद्देश्य भारतीय महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें सात प्रमुख शक्तियों (ज्ञान, संस्कार, सेवा, सुरक्षा, स्वावलंबन, स्वास्थ्य, और संगठन) के प्रति जागरूक करना और पारिवारिक मूल्यों, संस्कृति, और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। यह कार्यक्रम नारी शक्ति को जगाकर राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को केंद्रित करना है, जिसमें महिलाएं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देती हैं और समाज के उत्थान के लिए संकल्प लेती हैं। उन्होंने
महिलाओं को आत्म-सम्मान के लिए जागरूकता, के साथ संगठित और सशक्त बनाना ही। सप्त शक्ति संगम कार्यक्रमो के माध्यम से जो सात शक्तियाँ: ज्ञान, संस्कार, सेवा, सुरक्षा, स्वावलंबन, स्वास्थ्य, और संगठन फोकस क्षेत्र: पारिवारिक एकता (कुटुम्ब प्रबोधन), पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वच्छता, और स्वदेशी जीवनशैली। को आत्मसात कराने के आप सभी महिलाओं (शक्तियो )के द्वारा जो महिलाए इस कार्यक्रम किन्ही कारण उपस्थित नही हो पायी है, उनके बीच जाकर प्रचार प्रसार कर जागरूक करना आपकी भी जिम्मेदारी है, क्योकि आपही अपने पाल्यों ( बच्चों ) की प्रथम गुरु है, और आपका परिवार पाठशाला है, क्योकि बच्चे विद्यालयो मे आचार्य एवं गुरुओं के संरक्षण मे 6 घण्टे और आपके पास  18 घण्टा रहता है, इसलिए आचार्य/ आचार्यों से अधिक नैतिक रूप जिम्मेदारी आपकी भी है, इसलिए अपने दायित्वों एवं कर्तव्यो का पालन करते हुए घर पर भी अपने बच्चों की निगरानी करने के साथ मोबाईल और पैकिट बंद खाद्य पदार्थों से बच्चे को दूर रखे, तभी वह बेहतर शिक्षा एवं संस्कार प्राप्त कर बेहतर शिक्षा को प्राप्त कर उच्च कोटि का व्यक्तित्व बन सकता है।  विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान और इसकी विभिन्न इकाइयाँ (जैसे सरस्वती शिशु मंदिर विद्या मंदिर)।गतिविधियाँ: सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, प्रश्नोत्तरी, और संकल्प। नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है" के नारे के साथ, यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों के आधार पर महिलाओं को समाज के नेतृत्व के लिए तैयार करता है।
कार्यक्रम को विद्यालय के प्रबन्धक एवं पूर्व ग्राम प्रधान अशोक कुमार पत्रकार ने अपने सम्बोधन मे कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सदैव जागरूक रहकर अपने भैया बहनो को शिक्षा एवं संस्कार के लिए प्रेरणादायी बने, ताकि वे परिवार और समाज में केंद्रीय भूमिका निभा सकें। विद्यालय के प्रधानाचार्या उमेश चन्द्र त्रिपाठी ने उपस्थित माताए एवं बहनो को सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्या भारती  द्वारा संचालित विद्यालयों मे बेहतर शिक्षा एवं संस्कार देने के साथ 'पंच परिवर्तन' (कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य) के विचारों पर जोर भी दिया जाता है। विद्यालय की बरिष्ठ आचार्या श्रीमती सोनी जी, ने अपने प्रेरणादायी कविताओं एवं गीत के माध्यम से उपस्थित माताओं को अपने दायित्यो के प्रति जागरूक किया । उक्त अवसर पर विद्यालय समिति के निर्वतमान अध्यक्ष चन्द्रिका प्रसाद गुप्त, उपाध्यक्ष छोटेलाल शास्त्री, वरिष्ठ आचार्य विरेन्द्र प्रताप मिश्रा, गरिमा सिंह, रागिनी मद्धेशिया, गरिमा गौड़, सत्या कुमारी, विनायक त्रिपाठी, राघबेन्द्र मिश्रा, अश्वनी चौरसिया आदि प्रमुख रूप से रहे । कार्यक्रम का सफल संचालन आचार्या गरिमा सिंह के द्वारा किया गया ।