तमकुही राज विधानसभा में दलित समाज को आजादी के बाद अब तक किसी पार्टी ने विधायक पद का उम्मीदवार नहीं बनाया

Oct 24, 2026 - 17:43
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तमकुही राज विधानसभा में दलित समाज को आजादी के बाद अब तक किसी पार्टी ने विधायक पद का उम्मीदवार नहीं बनाया

तमकुही राज विधानसभा में दलित समाज को आजादी के बाद अब तक किसी पार्टी ने विधायक पद का उम्मीदवार नहीं बनाया

दलित अल्पसंख्यक पिछड़ी वर्ग के वोटो से विधायक बनकर अब तक लखनऊ की पंचायत में जाते रहे उम्मीदवार परंतु किसी ने दलित समाज के विकास के तरफ मुड़ करके भी नहीं देखा_ एडवोकेट चंद्रशेखर आर्य

अमिटरेखा_ कृष्णा यादव तमकुही राज कुशीनगर

विधानसभा तमकुही राज क्षेत्र संख्या 331 गरीबी गन्ना गंडक का पर्याय बनी, इस क्षेत्र में किसानों युवाओं और विद्यार्थियों के लिए विशेष कर दलित समाज लोगों में घोर निराशा है, इस वर्ग के विद्यार्थी इंटरमीडिएट शिक्षा ग्रहण करने के बाद सरकारी विद्यालयों में पढ़ने के लिए दूर जाना पड़ता है पैसे के अभाव में इस वर्ग के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने से वंचित होते जा रहे हैं। कुछ विद्यार्थी स्नातक की डिग्री लेकर के नौकरी या व्यवसाय नहीं मिलने के कारण सड़कों पर दर-दर भटक रहे हैं। अगर दलित समाज का एक भी विधायक तमकुही राज विधानसभा से चुनकर जाता तो इस समस्याओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष विधानसभा में प्रस्ताव लाता तथा तमकुही राज क्षेत्र का दलित समाज के विकास के लिए वहां आवाज उठाता। 
युक्त उद्गार आजाद समाज पार्टी के तमकुही राज विधानसभा क्षेत्र के नेता एडवोकेट चंद्रशेखर आर्य ने एक भेंट वार्ता में व्यक्त की तथा कहा कि आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश के अंदर आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन करके पूरे उत्तर प्रदेश के सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारने जा रही है। चर्चाओं के अनुसार उत्तर प्रदेश में एआई एम ए आई ओसुबद्दीन ओवैसी के पार्टी से वार्ता चल रही है अगर गठबंधन हो गया तो तमकुही ही राज विधानसभा से आजाद समाज पार्टी का प्रत्याशी मैदान में होगा। नए समीकरण के अनुसार दलित और मुसलमान अगर मिलकर के मतदान किया तो तमकुही राज विधानसभा का परिदृश्य ही बदल जाएगा और आने वाले समय में पिछड़े वर्ग के युवा नौजवान आजाद समाज पार्टी से जुड़कर अपनी उम्मीदों के महल का सपना भी तैयार कर सकते हैं। 
1989 में उत्तर प्रदेश की सेवरही विधानसभा क्षेत्र से निर्धन प्रत्याशी के रूप में भाई कासिम अली चुनाव जीतकर लखनऊ की पंचायत में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। 
2012 और 2017 में वैश  समाज से अजय कुमार लल्लू दो बार विधायक बने उसके बाद इस सीट पर किसी दलित अल्पसंख्यक पिछड़ी का बेटा चुनकर विधानसभा में नहीं गया क्योंकि किसी पार्टी ने इस समाज को विधायक का टिकट नहीं दिया। 
पूर्वांचल के अंतिम छोर पर स्थित तमकुही राज विधानसभा क्षेत्र एक अहम चुनावी गणित सामने रखता है, जहां अल्पसंख्यक ब्राह्मण भूमिहार पिछड़ा दलित वर्ग और दूसरी सामाजिक समूह का संतुलन जीत हार का बड़ा असर डालता है‌
चंद्रशेखर ने 2026 की अंतिम एसआई  आर के संबंध में बताया कि तमकुही राज विधानसभा में कल 3,44,957 मतदाता का नाम दर्ज है पुनरीक्षण से पहले 407,955 मतदाता थे। सत्यापन के दौरान 83,223 नाम हटे और उसके स्थान पर 20,225 नए मतदाता जोड़े गए। इस तरह 2027 से पहले चुनाव की गणित बदल गई है। 
आजाद समाज पार्टी के नेता के अनुसार 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार डॉ असीम राय को 1,15,123 वैट प्राप्त कर विजय हासिल हुई थी‌, दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के डॉक्टर उदय नारायण गुप्ता को कोी 48,551 मत प्राप्त हुए। कांग्रेस के अजय कुमार लालू को 33,496 मत प्राप्त हुए। बसपा उम्मीदवार संजय गुप्ता को 16,854 मत प्राप्त हुए और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार मतीउल्लाह सिद्दीकी को 2263 मत प्राप्त हुए थे जबकि इस बार 2027 में चुनाव सीधे पलट गया है और मतदाताओं की संख्या भी बढ़ रही है छूटे हुए मतदाताओं का नाम जिनकी उम्र 18 वर्ष पूरी हो गई है उनका नाम मतदाता सूची से जोड़ने का क्रम जारी है। 

आगे कहा कि दलित मतदाता 2027 के चुनाव में संतुलन का हिस्सा बनने जा रहा है। मुस्लिम दलित पिछड़ा वर्ग का एक संयुक्त मोर्चा इस बार मतदान करके तमकुही राज में नया चौंकाने वाला परिणाम लाने जा रहा है। आर्य ने दलित समुदाय के नवयुवकों से मतदाता सूची में नाम जोड़वाने की अपील किया है।