स्वतंत्रता आंदोलन के महानतम सेनानी थे चौधरी चरण सिंह - चंद्रभूषण सिंह यादव
अमिट रेखा/ नागेंद्र गोविंद राव /जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव/ रामपुर कारखाना /कुशीनगर
23 दिसम्बर 1902 को बाबूगढ़ छावनी के निकट हापुड़ तहसील के नूरपुर गांव में जन्मे पूर्व प्रधानमंत्री,किसान नेता,स्वाधीनता सेनानी एवं भारत रत्न चौधरी चरण सिंह ने सन् 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत् नमक कानून तोड़ने हेतु महात्मा गाँधी के नेतृत्व में हुए ‘‘डांडी मार्च‘‘ के तहत गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया था जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 06 माह की सजा हुई उक्त बातें चौधरी चरण सिंह की जयंती पर रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरी स्थित सपा जनसंपर्क कार्यालय पर आयोजित जयंती कार्यक्रम में व्यक्त करते हुए सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि चौधरी साहब 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में गिरफतार हो अक्टूबर 1941 में मुक्त हुए।महात्मा गाँधी के करो या मरो के आह्वान पर अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण मेरठ प्रशासन ने चौधरी चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया था।
सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि चौधरी चरण सिंह की देन है कि एक जुलाई 1952 को यूपी में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और किसानों एवं गरीबों को अधिकार मिला। पटवारी की जगह लेखापाल के पद का सृजन हुआ। किसानों के हित में उन्होंने बड़ौत से विधानसभा सदस्य पंडित उमराव दत्त शर्मा की सहायता से सन 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून बनाया जिसे उन्होंने विधानसभा में पारित कराया।केन्द्र सरकार में गृहमंत्री बनने के बाद चौधरी चरण सिंह ने मंडल आयोग और अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना किया। 1979 में वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक [नाबार्ड] की स्थापना किया।चौधरी साहब देश के किसानों एवं आम - आवाम के नेता थे जिन्हें जन्म- जयंती पर नमन है।
उक्त अवसर पर सुरेश हम नारायण सिंह,दयानंद यादव,नारायण प्रसाद, सोनू यादव,गोविंद यादव,अयोध्या वर्मा, बधई प्रसाद,नाजिर अंसारी, सोनू राईनी,संतोष मद्धेशिया, मुंद्रिका शर्मा, मुस्तकीम,व्यास यादव,संजय यादव आदि ने उपस्थितछ रह मतचौधरी चरण सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया |