श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर दुदही नगर पंचायत में निकला भव्य शोभा यात्रा, पूरा नगर पंचायत हुआ भक्ति मय 

Jan 24, 2026 - 18:00
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श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर दुदही नगर पंचायत में निकला भव्य शोभा यात्रा, पूरा नगर पंचायत हुआ भक्ति मय 

श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा दिवस पर दुदही नगर पंचायत में निकला भव्य शोभा यात्रा, पूरा नगर पंचायत हुआ भक्ति मय 

राम की पूजा करना बहुत आसान लेकिन राम बनना और राम के कार्य को करना बहुत कठिनतम :- स्वामी 

अमिट रेखा /राकेश कुमार वर्मा /दुदही /कुशीनगर 

श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा दिवस विशाल राम भक्तों की सभा को संबोधित करते हुए स्वामी दिव्य सागर महाराज  ने कहा कि सुनो मेरे हिंदू भाइयों एवं बहनों हमेशा याद रखना की जो राम आज पूजनीय है उन राम को राजकुमार राम से भगवान राम बनाने वाले जंगल के वह आदिवासी लोग थे जो आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं थे शैक्षणिक रूप से बहुत शिक्षित नहीं थे मगर भावनात्मक रूप से इस कदर राम से जुड़े थे की राम का कार्य ही उनको अपने जीवन का लक्ष्य दिखता था नतीजा यह हुआ कि जिन जंगल क्षेत्र में कभी न खत्म होने वाले राक्षस थे और उनकी सत्ता थी जिससे मुकाबला करने के नाम पर बड़े-बड़े राजा महाराजा चक्रवर्ती सम्राट भी डरते थे, उनसे लोहा लिया राम जी के नेतृत्व में वन में रहने वाले नारों ने जिनको बाद में अपभ्रंश के रूप में  वानर कहा जाने लगा वह वन नर थे राम की पूजा करना बहुत आसान है लेकिन राम बनना और राम के कार्य को करना इस धरती का कठिनतम और महानतम कार्य है,
अगर आप समाज की बुराइयों को मिटाने और अपनी मानसिक शुद्धि पर कार्य नहीं कर रहे हो तो राम का नाम ले तो रहे हो मगर जीवन को विष मुक्त विश्राम की तरफ बढाने का प्रयास नहीं कर रहे हो, इस वक्त मां भगवती मां जगत जननी मां जगदंबा मां परांबा की गुप्त नवरात्रि चल रही है गुप्त नवरात्रि का लक्ष्य ही होता है कि गुप्त रूप से हमारे अंदर फैल रही राक्षसी प्रवृत्तियों को समाप्त करने के लिए हम अपने अंदर से देवीय सत्ता के प्रकाश को प्रकाशित करें, और इस गुप्त नवरात्रि के शुभ उपलक्ष पर रामजी की यात्रा करना राम की यात्रा में शामिल होना, सहयोग करना निश्चित तौर से हमारे आने वाली पीढ़ी को यह बताना है कि तुम्हारे आदर्श राम है बुराई रूपी रावण नहीं, अगर आप राम के कार्य में सहयोग नहीं कर रहे हो तो रावण को बढ़ावा दे रहे हो... 
ऋग्वेद में रहते हैं सृष्टि की रचना यज्ञ से हुई यहां यज्ञ का तात्पर्य है कि जिस तरह यज्ञ में आहुति देकर हम यज्ञ संपन्न करते हैं वैसे ही सृष्टि के निर्माण कार्य में सबने अपने-अपने हिस्से की आहुति थी योगदान दिया था नतीजा यह हुआ की एक सुंदर सृष्टि की रचना हुई यानी हम लेने को अपना अधिकार तो समझे मगर उससे भी पहले हम योगदान के रूप में दे क्या रहे हैं यह हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए भारत में 1947 के बाद हम अपने अधिकारों की चर्चा बहुत करने लगे मगर हमारा कर्तव्य क्या है इसको दरकिनार कर दिया जबकि आजादी से पहले जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने लड़ाई की तो सब ने एक स्वर में कहा खुद से कि मैं अपने देश और देश की आजादी के लिए क्या योगदान कर रहा हूं यह उनका प्रश्न था स्वयं के लिए स्वयं से और उसी के परिणाम स्वरूप हमें एक स्वतंत्र देश प्राप्त हुआ, अगर हम अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना चाहते हैं तो आज भी समाज में चल रही रावण और राम की लड़ाई में हमें राम के पक्ष में आना ही पड़ेगा तभी रामराज की परिकल्पना हम कर सकते हैं रामराज श्रेष्ठ कर्म के गर्भ से उत्पन्न होता है, श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा दिवस के उपलक्ष में आयोजित शोभायात्रा की प्रशंसा करते हुए स्वामी दिव्य सागर जी महाराज ने कहा कि ऐसा आयोजन जिससे समाज के हर वर्ग का व्यक्ति जुड़े और राम की प्रेरणा उनके अंदर जागृत हो ऐसा आयोजन समाज के प्रत्येक क्षेत्र में होना चाहिए ताकि प्रत्येक सनातनी हिंदू के हृदय में राम तत्व जागृत हो तभी हिंदुत्व सच्चे अर्थों में सार्थक होगा।
स्वामी विवेकानंद जनसेवा संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप शर्मा ने कहा कि भगवान श्री राम भारत की आत्मा हैं।श्री राम ने एक आदर्श, एक प्रेरणा हमारे सामने रखा है। इसी आदर्श पर चलकर हमें इस भव्य भारत को अब दिव्य राष्ट्र मंदिर बनाना है। यह भारत प्राचीन काल से ही विश्व का प्रतिनिधित्व करता रहा है। यह ज्ञान, आदर्श विचार एवं संस्कार की जननी रहा है।श्रीराम ने जीवन भर धर्म और सत्य का पालन किया। उन्होंने रावण का वध करके यह सिद्ध किया कि अन्याय और अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद विभीषण को राजा बनाया, जिससे हमें सिखने को मिलता है कि जीतने के बाद भी अहंकार से दूर रहना चाहिए।राम केवल एक नाम भर नहीं , बल्कि वे जन-जन के कंठहार हैं, मन-प्राण हैं, जीवन-आधार हैं| उनसे भारत अर्थ पाता है| वे भारत के प्रतिरूप हैं और भारत उनका| उनमें कोटि-कोटि जन जीवन की सार्थकता पाता है| भारत का कोटि-कोटि जन उनकी आँखों से जग-जीवन को देखता है| उनके दृष्टिकोण से जीवन के संदर्भों-परिप्रेक्ष्यों-स्थितियों-परिस्थितियों-घटनाओं-प्रतिघटनाओं का मूल्यांकन-विश्लेषण करता है| भारत से राम और राम से भारत को विलग करने के भले कितने कुचक्र-कलंक रचे जाएँ, भले कितनी वामी-विदेशी चालें चली जायँ, यह संभव होता नहीं दिखता| क्योंकि राम भारत की आत्मा हैं| राम भारत के पर्याय हैं| राम निर्विकल्प हैं, उनका कोई विकल्प नहीं|जिस प्रकार आत्मा को शरीर से और शरीर को आत्मा से कोई विलग नहीं कर सकता, उसी प्रकार राम को भारत से विलग नहीं किया जा सकता| राम के सुख में भारत के जन-जन का सुख आश्रय पाता है, उनके दुःख में भारत का कोटि-कोटि जन आँसुओं के सागर में डूबने लगता है और वे अश्रु-धार भी ऐसे परम-पुनीत हैं कि तन-मन को निर्मल बना जाते हैं।