राम -जन्म धर्म,मर्यादा औऱ आनंद का प्रतीक-- राजन जी
राम जन्म के भजनों में भाव विभोर रहे श्रद्धालू
अमिट रेखा/ जितेन्द्र कुमार
गोरखपुर का वातावरण राममय हो गया है l अवसर है विख्यात कथावाचक राजन ज़ी द्वारा चंपा देवी पार्क में 27 जनवरी से चल रही श्री राम कथा के तीसरे दिन आज व्यास पीठ से श्री राम जन्म प्रसंग, जिसने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया l
यजमानों द्वारा आरती पूजा के उपरांत राम जन्म प्रसंग सुनने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं से राजन जी ने कहा की धरा पर राम का जन्म धर्म मर्यादा आनंद,सुख एवं शांति और इन सबके साथ धर्म की स्थापना का आधार है इसलिए राम -नाम का महत्व है lभोजपुरी,मैथिली भजनों के साथ इस प्रसंग की जो छटा बँधी तो वहां उपस्थित अपार जन समुदाय रामजन्म के उल्लास में डूब गया राजन जी ने कहा कि श्री राम जन्म मानवता को मार्ग दिखाने के लिए है l श्री राम जी ने पुत्र,पति,राजा और आदर्श पुरुष के रूप में जो मर्यादित जीवन जिया उस कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया l
भक्तों की रक्षा के लिए स्वयं नारायण द्वारा राम के रूप में लिया गया अवतार धरती पर प्रकाश और चेतना के विस्तार का प्रतीक है l राम - जन्म इस जन्म की सुंदरता राम का रूप और उनकी लीला इतनी मोहक है कि पाषाण हृदय भी मुग्ध हो जाए l राजन जी ने कहा राम कष्ट को सहकर भी उच्च नैतिक मूल्यों की स्थापना करते हुए आदर्श रखते हैं इसीलिए राम प्रातः स्मरणीय हैं l इस अवसर के लिए अपने लोकप्रिय भजन " राजा ज़ी खजनवा दे द " जब शुरू हुआ तो पंडाल राम के रूप औऱ उनके आकर्षण में डूब कर तालियां बजाते हुए झूम उठे l
आज की कथा के महत्वपूर्ण बिंदुओ को बताते हुए राजन जी नें राम जन्म प्रकाट्य की कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जन्म पाकर सत्संग मिल रहा है, तो वह प्रभु की कृपा है और राम कथा सुनने का वही अधिकारी है जिसे शंकर जी के चरणों में प्रेम है। परम ब्रह्म ही महाराजा दशरथ जी के घर में पुत्र के रूप में खेल रहें हैं
राजन जी महाराज ने कहा कि याज्ञवल्क मुनि राम कथा सुनाते है । कथा व्यास ने कहा कि वह धन्य है जो मनुष्य शरीर पाकर परमात्मा में विश्वास आ गया, जिसके जीवन में सत्संग आ गया और जो राम रूपी अमृत को पी लिया। भक्त का लक्षण बताते हुए कहा कि लक्षण बताता है कि वह भक्त है। कथा सुनते सुनते पर भक्त का रोम रोम पुलकित होने लगेगा, वाणी अवरुद्ध हो जाएगी, आंखों से अश्रु पाठ होने लगेगा।
राम कथा की महिमा का वर्णन करते हुए राजन जी महाराज ने कहा कि जीवन में भगवत कृपा राम कथा सुनने को मिलता है। भगवत कृपा से सब कुछ हो रहा है। कर्ता नहीं बनना है, निमित्त होकर रहना है । कर्ता केवल भगवान है, वही सब कर रहे हैं।
जिस पर रघुनाथ जी की कृपा होती है उसे सरस्वती जी की कृपा स्वत: हो जाती है। जीवन में सत्संग मिल रहा है तो मानिए कि भगवान आपको अपना जन्म मानते हैं यह परम सौभाग्य है।
राजन जी महाराज के भक्ति गीतों पर श्रोता दर्शन झूमते रहे, तालियों के बीच भक्ति गंगा बहती रही।
भजन -हरदम भक्तन के ऊपर प्रभू जी के नजरिया घुमेला।
राजन जी महाराज ने कहा कि श्रेष्ठ लक्ष्य प्राप्त करने का पहली शर्त है मन को शांत कर लीजिए। कथा व्यास ने कहा कि भक्त जिसका चिंतन करता है, उसका आचरण भक्त के व्यवहार में दिखने लगता है। भगवान शंकर दिन रात राम जी का चिंतन करते हैं। राम जी शांत स्वरूप है। वह पाप रहित मोक्ष शांति देने वाले हैं।
आज की कथा में डॉ कुमुद त्रिपाठी मदन मोहन त्रिपाठी,अशोक शुक्ला, राजकन्या शुक्ला, डॉ भोलेंद्र नारायण दूबे ,डॉ उपमा दूबे,श्री दूबे,शुभ दूबे कौशल किशोर त्रिपाठी,किस्मती त्रिपाठी,पुष्प दंत जैन ,अनिता जायसवाल, विशाल जायसवाल आयुषी जायसवाल,सुनील त्रिपाठी ,अनुपमा त्रिपाठी ,सुनील मिश्रा ,पूनम मिश्रा,अश्वनी कुमार राय , श्रीमती रीना राय,श्री प्रदीप पांडेय,रेनू पांडेय, रमा शंकर राय यजमान थे l मंच का संचालन बृजेश राम त्रिपाठी ने किया l
मुख्य अतिथियों में जगदम्बिका पाल सांसद, राकेश त्रिपाठी राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा, अनिल त्रिपाठी विधायक अभिषेक त्रिपाठी विधायक, पूर्व मेयर डॉ सत्या पाण्डेय, जगदीश आनंद,अन्नू मिश्रा, विश्वजिताशु सिंह आशु, की उपस्तिथि थी l
आयोजन समिति के सदस्यगण गिरजा शंकर त्रिपाठी, डॉ चमन कुमार, जितेंद्र देव उपाध्याय,मधुबाला पांडेय, राजकुमार श्रीवास्तव, अशोक मिश्रा,गोविन्द गौड़, निखिल पाण्डेय, सुब्रत पाण्डेय,आशुतोष पाण्डेय, रिपुंजय मिश्र, अभिषेक त्रिपाठी, धन गुप्ता, नवीन मणि त्रिपाठी,विनय कुमार श्रीवास्तव, विजय कुमार श्रीवास्तव, अमरनाथ मिश्रा, हरे राम यादव,आदर्श शुक्ला, श्वेता श्रीवास्तव, अमिता गुप्ता, रागिनी जायसवाल, अचला शाही, शिवम् शुक्ला,अंकित मणि त्रिपाठी,अरविन्द, यादव,संजय मिश्रा, राज पाण्डेय, अर्पित पाण्डेय, सुजीत सैनी, बाल मुकुंद एवं आयोजन समिति के तमाम सदस्यगण के साथ - साथ लगभग हजारों की संख्या में श्रद्धालु राम जन्म कथा साक्षी बनें l