मधवलिया वन क्षेत्र में वन विभाग ने एक संदिग्ध शिकारी को किया गिरफ्तार
अमिट रेखा /जितेंद्र तिवारी/ महराजगंज
भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे मधवलिया वन क्षेत्र में वन विभाग ने एक संदिग्ध शिकारी को गिरफ्तार करने के लिए बड़ी और सटीक कार्रवाई के लिए दस्तावेज तैयार किए हैं। कार्रवाई के दौरान उनके व्यवसाय से दुर्लभ प्रजाति के आठ लालसर पक्षी बरामद किए गए, जिनमें नेपाल की फाइलें भी शामिल थीं। वन विभाग ने प्राकृतिक संसाधनों के विरुद्ध संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्रीय वन अधिकारी (फिक्सो) मधवलिया अजित कुमार सीमा को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक पेशेवर शिकारी क्षेत्र सक्रिय है और संरक्षित पक्षियों का शिकार कर उन्हें अवैध रूप से नेपाल ले जाने की तैयारी में है। सूचना को सूचीबद्ध करते हुए विभाग ने संयुक्त टीम के साथ संयुक्त टीम का गठन कर सीमा क्षेत्र में चौकसी को बढ़ा दिया।
सूचना के आधार पर चलाए गए घेराबंदी एवं घेराबंदी अभियान के दौरान ग्रामसभा मरचहवा स्थित एक गांव में एक संदिग्ध व्यक्ति की नजर पड़ी। टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे मशीन पर ही पकड़ लिया। उसके पास से आठ लालसर पक्षी बरामद किए गए, जिनमें अवैध रूप से शिकार कर उसे अपने व्यवसाय में रखा गया था।
पूछताछ में नवजात ने अपनी पहचान नसरबाद (37 वर्ष) पुत्र निवासी ग्राम कुसम्ही, थाना रामकोला, जिला के रूप में बताई। शुरुआती पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि पहले भी इस तरह की बातचीत में शामिल हो सकते हैं। वन विभाग इस बिंदु पर भी गहनता से जांच कर रहा है कि इसके पीछे कहीं भी कोई ऑब्जेक्टिव गैंग तो सक्रिय नहीं है।
वन विभाग ने सभी आठ लालसर पक्षियों को बरामद कर अपने संरक्षण में ले लिया है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मधवलिया रेंज को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की सीमा के तहत जेल में बंद कर दिया गया।
इस कार्रवाई को भारत-नेपाल सीमा पर आपूर्ति सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। आरओ अजित कुमार ने स्पष्ट रूप से बताया कि सीमा क्षेत्र में संपत्तियों को किसी भी सूरत में अनदेखा नहीं किया जाएगा और ऐसे नोटों के आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी स्थान पर शिकार या तीर्थयात्रा से संबंधित कोई संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें।
वन विभाग और एसएसबीई की इस संयुक्त कार्रवाई से न सिर्फ एक बड़ी वस्तु की कोशिश नाकाम हुई है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि जंगलों और जंगलों की सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और संवेदनशील है।