घायल अनशनकारी महिला का जिला अस्पताल में हो रहा है इलाज

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अमिट रेखा/अजय तिवारी/नेबुआ नौरंगिया/कुशीनगर 

दबंगो के आगे बेबस पीड़िता को प्रशासन से न्याय मांगना जी का जंजाल बना

नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के पिपरा बाजार निवासिनी एक महिला लम्बे समय से एक व्यक्ति पर जबरिया भूमि कब्जा करने का आरोप लगाकर न्याय की उम्मीद लिए जिले से लगायत मुख्यमंत्री जनता दरबार में भी गुहार लगाने के बाद भी कोई सटीक कार्यवाही नही होने पर, न्याय की उम्मीद लेकर घर पर ही दो बार अनशन करने पर, न्याय की जगह अधिकारियों से बदसलूकी करने के आरोप का अब मुकदमा झेलना पड़ रहा है। लोगों में चर्चा है कि पहले अनशन पर ही मामले का निस्तारण कर दिया गया होता तो बात यहां तक नहीं पहुंची होती।
बरवापट्टी टोला निवासी तरीकुन नेशा के मुताबिक उसके सौहर तीन भाई हैं। उसके जेठ अब्दुल हक ने अपने हिस्से की भूमि बगल गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दिया। उसका आरोप है कि खरीदने वाले व्यक्ति ने चौहद्दी के अनुसार उक्त भूमि पर कब्जा कर लिया गया। लेकिन कुछ दिनों बाद बगैर पैमाइश के ही मेड़ तोड़ कर उसके भूमि पर लगी फसल को ट्रैक्टर से जोत कर जबरन कब्जा कर लिया। विरोध करने पर दबंगों ने महिला और उसके परिवार के लोगो के साथ मारपीट भी किया था। महिला का आरोप हैं की सूचना देने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने उसकी मदद नहीं की थी। जिसको लेकर 18 सितम्बर को अपने कुनबे के साथ घर पर ही अनशन शुरू कर दिया। जानकारी के बाद 19 सितंबर को पहुंचे उच्चाधिकारियों ने 20 सितम्बर को भूमि विवाद का निस्तारण कराने का लिखित आश्वासन देकर अनशन समाप्त करा दिया। उनके द्वारा यह भी मौखिक और लिखित दिया गया कि समयावधि के अंदर मामले का निस्तारण नहीं हुआ तो वह पुनः अनशन पर बैठ सकतीं हैं।20 सितम्बर को पहुंचे राजस्व की टीम ने भूमि विवाद का निस्तारण कराने में असफल रही। 27 सितम्बर को मुख्यमंत्री जनता दर्शन में पीड़िता के गुहार लगाने के बाद भी मामले का समाधान नहीं हो पाया। महिला ने 25 अक्टूबर को जिलाधिकारी के वहां प्रार्थना पत्र सौंपकर उचित कार्यवाही की मांग किया था, जिस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम पडरौना को मामले का निस्तारण कराने का निर्देश दिया था। लेकिन इस प्रार्थना पत्र पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। पुनः 10 अक्टूबर को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर महिला ने मामले का निस्तारण कराने की गुहार लगाते हुए न्याय न मिलने की दशा में 1नवम्बर से कुनबे के साथ अनशन करने की प्रार्थना पत्र देकर प्रशासन को अवगत करा दिया। 1नवम्बर को पीड़िता ने अपने दरवाजे पर ही पुरे कुनबे के साथ आमरण-अनशन पर बैठ गयी। 2नवम्बर को राजस्व व पुलिस टीम ने अनशन स्थल पर पहुंचकर असंबैधानिक बताने लगे, जिसपर बात आगे बढ़ गयी। आरोप है कि प्रशासन के द्वारा बदसलूकी करने के आरोप में चार लोगो को पकड़ कर थाने ले जाकर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। वही अनशनकारी व उसके परिजनों का आरोप है पुलिस उनके साथ मारपीट कर जबरिया उन्हे अनशन स्थल से उठा ले गयी।
अगर सूत्रों की माने तो अनशनकारी पुलिस के द्वारा की गयी कार्यवाही मे जमानत कराकर घर वापसी के उपरांत गंभीर चोटो के वजह से बेहोस हो गयी। जहाँ ग्रामीणों के सहयोग से एम्बुलेंस के माध्यम से समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नेबुआ नौरंगिया ले जाया गया, जहाँ पीड़िता की गंभीर हालात को देखते हुवे चिकित्सको ने उसे जिला अस्पताल पडरौना रेफर कर दिया। जहा दो दिनों से उसका इलाज जारी है। ग्रामीणों में एक चर्चा आम है कि यदि पीड़िता को समय रहते न्याय मिल गया होता तो मामला यहां तक नहीं पहुंचता। मामले का हल निकालने में असफल सिस्टम का खामियाजा पीड़ित परिवार को अब भुगतना पड़ रहा है।

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