विद्यालय आवंटन न होने से परेशान नवनियुक्त 880 शिक्षक

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अमिट रेखा
खोरी बारी/भटनी देवरिया

उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती के दूसरे चरण में नियुक्त शिक्षक विद्यालय आवंटन न होने परेशान हैं। इन शिक्षकों को हस्ताक्षर बनाने के लिए प्रतिदिन घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। बीएसए कार्यालय पर फिलहाल ऊपर से आदेश आने की बात कहकर मामले से में असमर्थता व्यक्त कर रहा है।
परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत दूसरे चरण में 880 शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। इनमें से पांच दिसंबर को 823 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया था। बाकी के 57 शिक्षकों को जनपदीय समिति की समीक्षा के बाद नियुक्ति पत्र दिया गया। वहीं प्रथम चरण के 15 शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र दिया गया। इन शिक्षकों को सात दिसंबर से बीएसए कार्यालय में उपस्थिति बनाने का निर्देश दे दिया गया। इसके लिए महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग काउंटर बना दिए गए। महिलाओं को सुबह 9:30 बजे से 12:30 बजे तक और पुरुषों को 12:30 बजे से 3:30 बजे तक हस्ताक्षर बनाने का मौका दिया जा रहा है। इन तीन घंटों में एक काउंटर पर चार सौ से अधिक शिक्षकों को हस्ताक्षर बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके चलते काउंटर से लेकर बीएसए कार्यालय के गेट के बाहर तक लाइन लग जा रही है। इस जद्दोजहद में कोरोना से बचाव के लिए जरुरी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं हो पा रहा है। इस कतार को सुव्यस्थित करने के लिए कार्यालय की तरफ से कोई कर्मचारी भी नहीं तैनात है।
नियुक्त शिक्षकों में गाजियाबाद, कानपुर, बहराइच, बनारस, जौनपुर समेत दूरदराज के अनेक जिलों के युवा शिक्षक पद पर तैनात हुए हैं। विद्यालय आवंटन न होने से तैनाती की जगह को लेकर संशय है। इससे शिक्षक कमरा किराए पर नहीं ले पा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि शहर में कमरा लें और तैनाती बनकटा, भाटपार, लार या अन्य किसी दूर दराज के ब्लॉक में हो जाए तो मुश्किल हो जायेगी। इसके चलते कुछ शिक्षक रिश्तेदार, दोस्त या होटल की शरण में हैं। इससे इनका प्रतिदिन का खर्च भी बढ़ गया है।
पहले चरण में नियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने से एक सप्ताह के अंदर विद्यालय आवंटन हो गया था। वहीं इस बार अधिक संख्या है, इसके बावजूद नियुक्ति पत्र वितरण के 20 दिन बाद भी विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इससे शिक्षकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षकों से किसी रजिस्टर की जगह कागज की शीट पर हस्ताक्षर बनवाया जा रहा है। हांलाकि इसको प्रतिदिन कम्प्यूटर में फीड किया जा रहा है। पर नई नौकरी पाए शिक्षकों के साथ-साथ पुराने शिक्षकों को भी यह सब किसी अबूझ पहेली की तरह लग रहा है।

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