तहसीलदार लेखपाल की मनमानी राजस्व की हानि

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अमिट रेखा – प्रशांत यादव
देवरिया

वैसे तो जल ही जीवन है लेकिन जनता ने उस जल संचय करने वाले पोखरी और तालाबों के ऊपर जब अवैध कब्जा करना शुरू किया तो देश की सर्वोच्च अदालत एवं माननीय उच्च न्यायालय ने उसे बचाने के लिए बेदखली संरक्षण एवं एवं पोखरी के स्वरूप को पहले जैसा करने संबंधित कई आदेश पारित किए तो दूसरी तरफ शासन ने भी कई आदेश उसे बचाने के लिए जारी किए |
लेकिन देवरिया में राजस्व कर्मचारियों/ अधिकारियों की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगता है कि न्यायालय से पारित आदेशों और शासनादेशों की सुविधा शुल्क के आगे कोई वजूद नहीं है | तभी तो ना तो इनके पास जिले में पोखरी तालाब का कोई रिकॉर्ड है और ना ही प्रशासन ने यह रिकॉर्ड खोज कर उसे बचाने का कोई प्रयास किया अलबत्ता जब किसी ने इस संदर्भ में छानबीन कर जनहित में पोखरी और तालाब पर अवैध कब्जे के तथ्य को उजागर किया तो शिकायतकर्ता को ही डैमेज करने का प्रयास किया जाता है साम दाम दंड भेद लगाकर राजस्व के कर्मचारी अपनी निष्क्रियता छुपाने के लिए माहिर माने जाते हैं |देवरिया प्रशासन / राजस्व विभाग की निष्क्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने ही आदेशों का पालन नहीं करा पा रही है या फिर कराना ही नहीं चाह रही |
मामला शहर से सटे ग्राम पंचायत सोन्दा का है जहां अराजी संख्या- 242 पर कुछ भूमाफियाओं द्वारा 132 की भूमि / पोखरी की भूमि होने के बावजूद जबरन अवैध निर्माण कर लिया गया है | जिस पर धारा -67 का आदेश दिनांक 13:06:2018 को पारित है |जिसके क्रम में अवैध कब्जा हटाने हेतु तहसीलदार देवरिया द्वारा 1 लंबी चौड़ी टीम का आदेश भी 24:09:2020 को पारित है लेकिन आज तक मौके पर कोई टीम ना गई और ना ही कब्जा हटाया गया जिसके उपरांत शिकायत कर्ताओं ने पुनः शिकायत की और 07:10:2020 को जनता दर्शन में कृ- जिलाधिकारी द्वारा तहसीलदार देवरिया को अवैध कब्जा हटाने के लिए आदेशित किया गया | जिस पर आख्या रिपोर्ट लगाते हुए तहसीलदार ने आचार संहिता का हवाला दिया और चुनाव बाद मामले को निस्तारित करने का लिखित आश्वासन शिकायत कर्ताओं को दिया |लेकिन यह देवरिया जिले की विडंबना है या फिर राजस्व अधिकारियों की हरामखोरी जो वह जनता की प्रॉपर्टी को सुविधा शुल्क लेकर टालमटोल कर रहे |
तभी तो इस संदर्भ में मेरे द्वारा जब तहसीलदार देवरिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब इस मामले में कायमी दायर है |आपको जानकारी के लिए बता दें कि इस कायमी पर कोई स्थगन आदेश नहीं है और पूर्व की नजीरो को देखें तो राज्य की संपत्ति को बचाने के लिए अधिकारियों के पास यह अधिकार है कि वह अपने अधिकारों का उपयोग कर राज्य की संपत्ति की रक्षा कर सकते हैं और उसे क्षति पहुंचाने वाले से उसकी पूर्ति भी कर सकते हैं | परंतु तहसीलदार देवरिया का ऐसा कोई मत दिख नहीं रहा की वह कार्यवाही के मूड में हो |
इस संदर्भ और व्याख्या रिपोर्ट के बारे में वहां के लेखपाल से भी जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा मुझे पुरे मामले की जानकारी है, मैंने अपनी रिपोर्ट दे दी है सक्षम अधिकारी कार्यवाही करें या ना करें यह उनकी जिम्मेदारी है, आज नहीं कल तो उसे खाली कराना ही है ऐसे में मेरे अधिकार क्षेत्र में कुछ नहीं |
अब जनता क्या समझे कौन किसे बेवकूफ बना रहा कौन किसे फर्जी रिपोर्ट दे रहा कौन कार्यवाही नहीं चाहता कौन कार्यवाही नहीं कराना चाहता क्योंकि संपत्ति तो आपकी है राज्य की है और उस पर कब्जा अवैध है यह बात तहसीलदार कह रहे है और लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट लगाकर कह दी है | तो कौन भ्रमित कर रहा है और कौन राज्य की संपत्ति को क्षति पहुंचा रहा है मामला सिर्फ एक नहीं है सामने वहीं पर सावित्री नर्सिंग होम है उसका भी वही मामला है जिसमें 7 तारीख को जिलाधिकारी कोर्ट में तारीख है आपको उस से अवगत कराया जाएगा ताकि आप जान सके कि आपके जिले में बैठे हुए अधिकारी राज्य की संपत्ति को कैसे लूट, लूटा रहे, कैसे क्षति पहुंचा रहे हैं।

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