महिलाओं व बालिकाओं का संबल बनी योजनायें

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देवरिया(सू0वि0) 26 दिसम्बर। सूबे की महिलाओं और बालिकाओं के सपनों को पंख देने का काम सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनायें कर रहीं हैं। बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए जहां मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं चलायी जा रहीं हैं, वहीं महिलाओं के लिए पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिला पेंशन और वन स्टाप सेंटर योजना चल रही हैं। इसके साथ ही किसी भी मुसीबत में घर बैठे हेल्पलाइन के जरिये तत्काल राहत पहुंचाने का भी काम चल रहा है। मिशन शक्ति अभियान के जरिये अब इन योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी तेजी से हो रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं और बालिकाएं इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजनाः- सूबे में समान लिंगानुपात व कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को सुदृढ़ करने, बालिका के परिवार को आर्थिक मदद और बालिका के प्रति आमजन की सोच में बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना मार्च 2019 में शुरू हुई। योजना का लाभ पाने के लिए उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए, परिवार में अधिकतम दो बच्चे हों और वार्षिक आय तीन लाख से कम हो । योजना के तहत बालिका के जन्म पर 2000 रुपए, एक साल का टीकाकरण पूर्ण होने पर 1000 रुपए, कक्षा- 1 में प्रवेश के समय 2000 रुपए, कक्षा-6 में प्रवेश के समय 2000 रुपए, कक्षा-9 में प्रवेश के समय 3000 रुपए और 10वीं/12वीं परीक्षा उत्तीर्ण कर डिग्री या दो वर्षीय या अधिक डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 5000 रुपए एकमुश्त सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं। अब तक लगभग पांच लाख बालिकाओं को इस योजना से लाभान्वित किया गया है।

181-महिला हेल्पलाइन तथा वन स्टॉप सेन्टरः- महिलाओं, बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए टोल फ्री नम्बर – 181 जारी किया गया है। इस पर किसी भी वक्त मुसीबत में मदद ली जा सकती है। इसका केन्द्रीयकृत कॉल सेंटर लखनऊ में संचालित होता है। हेल्पलाइन पर मौजूद प्रशिक्षित परामर्शदाता समस्या के समाधान को हर वक्त मुस्तैद रहते हैं। वर्ष 2019-20 में 1.23 लाख महिलाओं को इसके जरिये मदद पहुंचाई गयी। 181 महिला हेल्पलाइन में प्राप्त प्रकरणों को भोतिक सहायता केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित वन स्टाप सेंटर के माध्यम से पहुँचाई जाती है। योजना की शुरूआत वर्ष 2016-17 में में की गयी। इस योजना का उदेश्य हिंसा से पीड़ित महिलाओं को मदद पहुंचाना है। इसके ही छत के नीचे महिलाओं तथा बालिकाओं को पांच दिवसीय प्रवास, चिकित्सीय सहायता, परामर्श, विधिक सहायता और पुलिस की मदद पहुंचाई जाती है। प्रदेश के सभी जिलों में यह सेंटर काम कर रहे हैं। वर्ष 2019-20 में इन सेंटरों पर करीब 15,000 महिलाओं के मामले सामने आये, जिसमें महिलाओं की हर संभव मदद की गयी ।

बाल संरक्षण सेवाएं- केंद्र सरकार के सहयोग से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत विधि विरुद्ध कार्यों में लिप्त बच्चों के संरक्षण, कल्याण एवं पुनःस्थापन के लिए राज्य सरकार द्वारा बाल संरक्षण सेवाएं योजना चल रही है। इसके तहत 51 राजकीय संस्थाएं चल रहीं हैं जिनमें 26 राजकीय सम्प्रेक्षण गृह, आठ बाल गृह (बालक), चार बाल गृह (बालिका), पांच बाल गृह (शिशु), दो विशेष गृह, एक प्लेस ऑफ सेफ्टी, पांच पश्चातवर्ती देखरेख संगठन शामिल हैं। मार्च 2020 में शासकीय एवं सहायता प्राप्त संस्थाओं में 4261 बालक निवासित थे। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 271 बालकों को दत्तक ग्रहण के माध्यम से ई पुनर्वासित किया गया है और अपने परिवार से में बिछड़े 6800 बालकों को उनके परिवार से मिलाया गया

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