माँ कहूँ या भगवान बात तो एक है!. गुड्डू गुप्ता

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अमिट रेखा सुनील पांडेय
ब्यूरो महराजगंज

महाराजगंज जब चोट कभी मेरे लग जाती थी
तो आँख तेरी भी तो भर आती थी
इसलिए एक आदर्श जीवन के निर्माण में माँ का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। इस बात को मैं काफी गर्व और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इस दुनिया में माँ ही सबसे अच्छी शिक्षक है क्योंकि जन्म देने के साथ ही उसने शुरुआती जीवन में वह हर एक चीज सिखायी है,
माँ एक सुखद अनुभूति है। वह एक शीतल आवरण है जो हमारे दुःख, तकलीफ की तपिश को ढँक देती है। उसका होना, हमें जीवन की हर लड़ाई को लड़ने की शक्ति देता रहता है। सच में, शब्दों से परे है माँ की परिभाषा।
माँ शब्द के अर्थ को उपमाओं अथवा शब्दों की सीमा में बाँधना संभव नहीं है। इस शब्द की गहराई, विशालता को परिभाषित करना सरल नहीं है क्योंकि इस शब्द में ही संपूर्ण ब्रह्मांड, सृष्टि की उत्पत्ति का रहस्य समाया है। माँ व्यक्ति के जीवन में उसकी प्रथम गुरु होती है, उसे विभिन्ना रूपों-स्वरूपों में पूजा जाता है। कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में मातृ ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। भारतीय संस्कृति में जननी एवं जन्मभूमि दोनों को ही माँ का स्थान दिया गया है।

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