दर्जनों पुलिसकर्मी एसटीएफ की रडार पर

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एसटीएफ उत्तर प्रदेश की पूर्वांचल यूनिट ने किया हाइवे का रुख
दर्जनों पुलिसकर्मी रडार पर

पूर्वांचल के गोरखपुर, कुशीनगर जनपद के हाइवे पर स्थित थानों एवं चौकियों पर तैनात लगभग डेढ़ दर्जन लोग है एसटीएफ के निशाने पर पूरे रफ्तार के साथ हाइवे के रास्ते अवैध शराब व पशुओं की तस्करी होने की चर्चा प्रदेश के राजधानी तक पहुँची।सूत्रों से आ रही पूरी खबर। पिछली सरकार में भी पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह ने लखनऊ तक पहुँचाई थी पशु तस्करी की खबर। तब लगभग तीन दर्जन लाइनरो के खिलाफ हुई थी थोक भाव में कार्यवाही। अवैध शराब व पशु तस्करी पर रोक लगाना और इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करना प्रदेश सरकार ने रखा है प्राथमिकता पशु व शराब तस्करों से अधिक उनके लिए काम करने वाले सरकारी मुलाजिमों पर है उनकी नजर पूर्वांचल के रास्ते बिहार को पशु एवं शराब तस्करी की खबर प्रदेश के सूबे तक पहुँचने के बाद हरकत में आया एसटीएफ सूत्रों की माने तो लगभग महीने भर से हाइवे की निगरानी कर तस्करों के सहयोग में लगे लाइनरो को रंगे हाथ पकड़ने के योजना पर काम कर रहा एसटीएफ टीम।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुशीनगर जिले के हाइबे थानों में कारखास ही तैनात होते हैं। और ‘कारखास’ की भूमिका निभाते हैं। इलाके में होने वाली वसूली और थाने के खर्च का पूरा लेखा जोखा इनके पास होता है। अमूमन सादे कपड़ों में रहने वाले ‘कारखास’ का रुतबा थानेदार से कम नहीं होता। मनचाही ड्यूटी लगवानी हो या मलाईदार चौकी पर पोस्टिंग, ‘कारखास’ की मर्जी से संभव है । थानों पर चल रहे पुलिस के इस अवैध सिस्टम को पुलिसकर्मियों के बेलगाम होने की बड़ी वजह माना जा रहा है पुलिस की विभागीय शब्दावली में भले ‘कारखास’ नाम का पद न हो, लेकिन थाने इनके बिना नहीं चलते। हर थाने में वसूली के लिए किसी न किसी सिपाही या दीवान को बतौर ‘कारखास’ रखा जाता है। थाने से होने वाली पूरी वसूली की कमान इनके पास होती है। साहबों के लिए पैकेट तैयार करने से लेकर थाने के मद में होने वाले खर्च का ब्योरा भी कारखास ही रखता है। हालात यह हैं कि भले ही थानेदार का तबादला हो जाए, लेकिन ‘कारखास’ बरसों तक जमा रहता है। शहर के थानों पर कई बार ‘कारखास’ को हटाने को लेकर हंगामा हो चुका है। जनपद में एक ऐसा ‘कारखास’ इतना पावरफुल है कि काफी दिनों पहले गैर जनपद ट्रांसफर होने के बावजूद जनपद में अंगद की तरह पांव जमाए बैठा है.जो सबका लेखा जोखा रखता है और सब का खास है जिसके कारनामे के चर्चे शासन तक है । ठेले से लेकर अवैध पार्किंग तक वसूली हर थाना क्षेत्र में लगने वाले अवैध ठेले और खोमचे वालों से लेकर अवैध पार्किंग से भी वसूली का जिम्मा ‘कारखास’ का होता है। नए थानेदार तो ‘कारखास’ की सलाह पर ही पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाते हैं।रात में भी शिकार तलाशती है पुलिस गश्त के नाम पर पुलिस कई बार राहगीरों से वसूली करने से भी बाज नहीं आती। आउटर के इलाकों में रात में अगर दूसरे जिले की गाड़ी नजर आ जाए तो मोटी रकम दिए बिना बच निकलना मुश्किल होता है। वैसे तो जनपद में ऐसे भी पुलिस के नुमायंदे है जो एक थानों पे कईयो दफा आ के जनपद में अंगद की तरह पाव जमाये बैठे हैं

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