2020: धनतेरस से दिवाली और भाई दूज तक जानें त्योहारों की सही तिथि और पूजा मुहूर्त

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  • 499 साल बाद बन रहा ऐसा संयोग इस बार दीपावली विशेष महत्व बढ़ जाता है, पहले 1521 में बना था
    अमिट रेखा
    शक्ति ओम सिंह
    खजनी गोरखपुर।
  • दिवाली का त्यौहार हिंदू धर्म में बेहद खास है। यह हिंदू धर्मों के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इस वर्ष दीपावली 14 नवंबर को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के दिन ही श्री राम ने लंकापति रावण का वध कर अयोध्या वापस आए थे। इस खुशी में ही दिवाली मनाई जाती है। उनकी वापसी पर अयोध्या ने दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे और उनका शानदार स्वागत किया गया था। इस दिन देवी लक्ष्मी और कुबेर पूजा की जाती है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक मिश्रा से तिथियां, पूजा का समय, शुभ मुहूर्त और दिवाली सप्ताह के बारे में।
  • दीपावली कार्तिक मास अमावस्या के दिन कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है, इस बार दीपावली 14 नवंबर 2020 को मनाई जाएगी, पांच दिवसीय दीपोत्सव इस साल 5 दिन के स्थान पर 4 दिन का होगा यानी छोटी दीपावली, रूप चौदस और दिवाली एक ही दिन मनाई जाएगी ,धनतेरस 1 दिन पहले 13 नवंबर को मनाया जाएगा ,16 नवंबर को भैया दूज मनाया जाएगा, इस दीपावली पर ग्रहों का बड़ा खेल देखने को मिलेगा जहां गुरु अपने स्वराशि धनु और शनि अपने स्वराशि मकर में रहेगा जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा, दीपावली पर तीनों ग्रहों का संयोग  2020 से पहले 1521 में बना था ऐसा संयोग 499 साल बाद बन रहा है इस बार दीपावली का विशेष महत्व बढ़ जाता है क्योंकि दीपावली इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी, दीपावली का महोत्सव 5 दिन का होता है, लेकिन इस बार 5 दिन के ना होते हुए 4 दिन का होगा ,जहां 13 नवंबर को धनतेरस, 14 नवंबर को दीपावली ,16 नवंबर भैया दूज  मनाई जाएगी, वही छठ का पर्व   20 नवंबर 2020 को सायं काल सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा एवं 21 नवंबर 2020 को सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं छठ व्रत का पूजा पाठ कर कर अपने व्रत का पालन करेंगे एवं 21 नवंबर को  पारण करेंगी, धार्मिक मान्यता है कि जिसके दिन सूर्यास्त के बाद एक घड़ी से अधिक तक अमावस्या तिथि रहे उसी दिन दीपावली मनाई जाती है अमावस्या तिथि  14 नवंबर 2020 को दोपहर 2:17 से दूसरे दिन 15 नवंबर को सुबह 10:36 मिनट तक अमावस्या तिथि रहेगी, त्रयोदशी तिथि 12 नवंबर की रात 9:31 मिनट से शुरू होगी जो 13 नवंबर को शाम 6:00 बजे तक रहेगी इसलिए 13 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी धनतेरस प्रदोष के दिन ही मनाया जाता है, इस बार दीपावली का विशेष महत्व बढ़ जाता है क्योंकि नवरात्र स्थापना शनिवार को हुई थी और इस बार दीपावली  भी  शनिवार को मनाया जाएगा, यह एक बड़ा मंगलकारी योग है कि  शनि स्वग्रही  मकर राशि पर यह योग बनाया हुआ है, जो व्यापार के लिए बहुत ही लाभकारी एवं जनता के लिए शुभ फलदाई रहेगा ,यह दुर्लभ संयोग बन रहा है दीपावली के दिन, क्योंकि दीपावली के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है और दीपावली की पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी इसलिए दीपावली का महत्व कई लाख गुना बढ़ जाता है, उत्तर दिशा में नीले एवम पीले  बल्ब या रोशनी  लगाने से लक्ष्मी जी की बड़ी विशेष कृपा प्राप्त होती है, 11 ,21 ,51 शुभ संख्या मानी जाती है , 11 घी के दिए अवश्य जलाएं, आम के पत्तों से अशोक के पत्तों से तोरण हल्दी से ओम ,स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं ,लक्ष्मी जी की विधिवत पूजा करें ,लक्ष्मी जी को पंचामृत, दूध मेवा, जनेऊ , पान, सुपारी, नारियल ,लोंग, इलाइची ,धूप कपूर ,अगरबत्ती ,मिट्टी का दिया, कलावा, शहद दही ,गंगाजल, गुड़ धनिया कमल एवं गुलाब काू फूल ,फल , गेहूं, जो दूर्वा ,चंदन इत्र ,सुगंधित अगरबत्ती  सिंदूर अर्पित करने चाहिए,

धनतेरस का शुभ मुहूर्त सायं काल 5:29 मिनट से लेकर सायं काल 5:49 मिनट तक रहेगा,

दीपावली का शुभ मुहूर्त एवं लक्ष्मी पूजा का समय सायं काल 5:40 मिनट से लेकर रात्रि 8:15 मिनट तक रहेगा, जिसमें सायं काल 5:49 मिनट से लेकर सायं काल 7:24 मिनट तक लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह समय स्थिर लग्न का होगा, स्थिर लग्न में लक्ष्मी जी की पूजा करने से लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है एवं स्थिर लक्ष्मी का वास होता है, जहां सिंह लग्न का मुहूर्त रात्रि 12:01 मिनट से लेकर रात्रि 2:19 मिनट तक रहेगा, इसमें भी मां लक्ष्मी की पूजा करने से कई गुना पुण्य फलों की प्राप्ति होती है एवं अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है

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